पुवायां। शनिवार दिन में टीके लगने के बाद रात में दो माह के बच्चे की मौत हो गई। इस पर परिवार के लोग आक्रोशित हो उठे और टीके को मौत का कारण बताते हुए पोस्टमार्टम कराने की कहने लगे। बाद में स्वास्थ्यकर्मियों के समझाने पर बच्चे के शव को दफनाया गया।
गांव बनिगवां निवासी अतुल कुमार ने बताया कि बंडा सीएचसी से स्वास्थ्य विभाग टीम ने शनिवार को गांव के स्कूल में तमाम बच्चों को टीके लगाए थे। उनके दो माह के पुत्र अंशित को भी एएनएम ने काली खांसी, टिटनेस, निमोनिया, पोलियो से बचाव के लिए तीन टीके लगाए थे। डायरिया, पोलियो से बचाव की दवा पिलाई गई थी। देर शाम बच्चे की हालत बिगड़ गई और रात दो बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया। परिवार के लोग टीकों को बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार बताते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग करने लगे। आशा कार्यकर्ता ने मामले की सूचना सीएचसी पर दी।
सीएचसी से ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक दिनेश शर्मा और स्वास्थ्य पर्यवेक्षक डॉ. जनमेजर सिंह गांव पहुंचे और अतुल से वार्ता की। टीम ने बताया कि टीकेे पूरी तरह से सुरक्षित हैं और बच्चे की मौत किसी अन्य वजह से हुई है। समझाने के बाद परिवार के लोग शांत हो गए और बच्चे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने मामले की जानकारी से इनकार किया है।
रोजाना तमाम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए जाते हैं, किसी को कोई नुकसान नहीं होता है। बच्चे की मौत का कोई और कारण रहा है। बच्चे की मौत का टीके से कोई मतलब नहीं है। - मनोज मिश्रा, सीएचसी प्रभारी बंडा