मनरेगा घोटालों की जांच के लिए सीबीआई के अफसरों की चार सदस्यीय टीम ने बृहस्पतिवार को शहर में दस्तक दे दी। हालांकि, लोकपाल और प्रशासन से जुड़े अधिकारी मामले में चुप्पी साधे हैं लेकिन विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सीबीआई के एक एडिशनल एसपी के नेतृत्व में आई टीम ने शहर के एक होटल में डेरा डाल रखा है। सीडीओ डॉ. राममनोहर मिश्रा के अनुसार जांच में सीबीआई को जरूरी अभिलेख मांगे जाने पर उपलब्ध कराए जाएंगे लेकिन अभी उनसे इस संबंध में किसी ने संपर्क नहीं किया है।
हरिहरपुर में मनरेगा घोटालों की तीसरी बार जांच के आसार
खुटार ब्लॉक के हरिहरपुर गांव में मनरेगा के तहत कराए गए कामों की सोशल ऑडिट टीम से कराई गई जांच में नौ लाख रुपये का घोटाला प्रकाश में आने के बाद तकनीकी समिति की जांच में संबंधित प्रधान और वहां के पंचायत सचिव को भले ही क्लीन चिट दिए जाने पर शिकायत करने वाले गांव के राजकुमार सिंह मुखर हो गए। वह भी सीबीआई तक अपनी बात पहुंचाने के प्रयास में हैं। इसके चलते अंतोगत्वा इस मामले में सीबीआई जांच होना तय माना जा रहा है। दरअसल, पहली जांच में गड़बड़ी सामने आने पर बीडीओ ने ग्राम प्रधान नवल किशोर सिंह, पंचायत सचिव हरिश्चंद्र शुक्ला और वहां के तकनीकी सहायक के विरुद्घ थाने में गबन की धारा के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। फिर ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज हुए और पंचायत सचिव को निलंबित भी किया गया। वहीं ग्राम प्रधान की मांग पर दुबारा जांच हुई तो दोनों को क्लीनचिट दे दी गई थी।
इस तरह दूसरी जांच में हुआ ‘खेल’
डीएओ पांडेय ने तकनीकी विशेषज्ञ के तौर पर आरईएस के एक्सईएन को साथ लेकर नौ माह बाद दुबारा जांच शुरू की तो पहली जांच के दौरान खामोश रहे आरोपितों ने सफाई दी कि जानकारी के अभाव में अधिक सामग्री खरीद ली। यही नहीं, ज्यादा खरीदी बताई गई निर्माण सामग्री का कुल मूल्य उतना ही बताया, जितनी धनराशि की रिकवरी निकली थी। जांचकर्ताओं ने भी भंडारित सामग्री का सत्यापन किए बगैर रिपोर्ट दे दी कि धन का दुरुपयोग नहीं किया गया। नतीजे में प्रधान की शक्तियां बहाल हो गईं, सचिव ड्यूटी पर बहाल हो गए और एफआईआर शून्य हो गई।