डीएम के गोद लिए गांवों में हर तीसरा बच्चा कुपोषित
- सांसद और सीडीओ के गांवों में भी बढ़ रहा कुपोषण
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। चाहे सांसद के आदर्श ग्राम नवादा दरोबस्त की बात हो या फिर डीएम और सीडीओ के गोद लिए लिए गए गांवों की, वहां के नौनिहाल कुपोषण की राह पर तेजी से बढ़ रहे हैं। डीएम द्वारा अंगीकृत किए गए गांवों में यह समस्या काफी गंभीर है। वहां हर तीसरा बच्चा कुपोषित है तो सीडीओ द्वारा अपनाए गए गांव भी कुपोषण की समस्या से अछूते नहीं हैं।
राज्य पोषण मिशन के तहत बाल विकास विभाग द्वारा गांवों में कराए गए सर्वे से यही तथ्य उभरकर सामने आए हैं। पांच वर्ष आयु तक के बच्चों का वजन लिए जाने पर कुपोषण के पैमाने पर सांसद कृष्णाराज का गांव नवादा दरोबस्त सबसे नीचे है। वहां दस फीसदी बच्चे कुपोषित पाए गए, जबकि डीएम शुभ्रा सक्सेना के गांव रौसर कोठी में 37 और सिसौआ में 32 प्रतिशत बच्चे कुपोषित मिले। इसी तरह सीडीओ डॉ. राम मनोहर मिश्रा के गांव अकबरपुर में 23 और बैवहा में 18 प्रतिशत बच्चे कुपोषित पाए गए। यह आंकड़े अभी बढ़ सकते हैं, क्योंकि तमाम बच्चों का वजन लिया जाना बाकी है।
खुदागंज। सांसद आदर्श ग्राम योजना में चयनित शहीद रोशन सिंह के गांव नवादा दरोबस्त में पांच वर्ष आयु तक के 155 बच्चों का परीक्षण किए जाने पर 16 बच्चे कुपोषित पाए गए, जबकि 139 का स्वास्थ्य सामान्य मिला। इसी ब्लॉक में सीडीओ द्वारा गोद लिए गांवों के नौनिहालों की हालत खराब है। अकबरपुर में 245 बच्चों में 204 का वजन लिए जाने पर 45 बच्चे कुपोषित और एक अन्य अति कुपोषित श्रेणी का मिला। इसी तरह बैवहा गांव के 290 में 232 की जांच किए जाने पर 37 बच्चे कुपोषित और चार अति कुपोषित मिले।
रौसर कोठी। डीएम द्वारा गोद लिए गए रौसर गांव में पांच वर्ष तक के 549 बच्चे हैं। वजन के आधार पर अभी तक 372 बच्चों की जांच हुई, जिनमें 132 कुपोषित और सात अति कुपोषित मिले हैं। इसी तरह डीएम के दूसरे गांव सिसौआ के 456 बच्चों में 138 कुपोषित और छह अति कुपोषित पाए गए। यह स्थिति सामने आने के बाद बाल विकास परियोजना से जुड़े कर्मचारियों की क्षेत्र में सक्रियता बढ़ गई है।
मानक में वजन के
साथ ऊंचाई शामिल
बच्चों में कुपोषण की स्थिति जांचने के लिए राज्य पोषण मिशन ने जो मानक तय किए हैं, उनमें आयु के सापेक्ष वजन सहित ऊंचाई को भी शामिल किया है। मिशन द्वारा जारी न्यूट्रीशनल स्टेटस चार्ट के अनुसार जन्म के समय बालिका का वजन दो किलो और बालकों का 2.1 किलो से कम नहीं होना चाहिए। नवजात बालक-बालिका की ऊंचाई भी क्रमश: 50.5 सेमी व 49.9 सेमी से कम नहीं होनी चाहिए। इसी तरह पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं का न्यूनतम वजन क्रमश: 12.4 व 12.1 किलो नियत है। इसी आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं की न्यूनतम ऊंचाई क्रमश: 109.9 और 108 सेमी होनी चाहिए।
अति कुपोषित बच्चे
अस्पताल में होंगे भर्ती
अधिकारियों का कहना है कि अब तक सर्वे में जो बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं, उनके स्वास्थ्य का गहन परीक्षण करके पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर ऐसे बच्चों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की जाएगी।