जीएसटी और ईवे बिल से जुड़ी समस्याओं का वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों द्वारा स्थायी समाधान नहीं किए जाने पर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारी बुधवार को एक बार फिर सड़क पर उतर आए। उन्होंने युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अनवार खां के नेतृत्व में कलक्ट्रेट जाकर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया और सिटी मजिस्ट्रेट विनय प्रकाश श्रीवास्तव को केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन देकर जीएसटी की विसंगतियां तत्काल दूर किए जाने की मांग दोहराई।
सिटी मजिस्ट्रेट से वार्ता करते हुए संगठन के प्रदेश मंत्री/जिलाध्यक्ष सतीश वर्मा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों ने चुनाव से पहले व्यापारी संगठनों को विभिन्न मंचों से आश्वस्त किया कि देश के अन्य राज्यों की तरह प्रदेश में मंडी शुल्क समाप्त करने पर विचार किया जाएगा और सरकारी विभागों के शोषण से निजात दिलाई जाएगी। सरकार बनने के बाद पहले नोटबंदी, फिर जीएसटी और बाद में ई-वेबिल, एफडीआई जैसे फैसले करके व्यापारियों को परेशानियों की भट्ठी में झोंक दिया गया। यही नहीं, अब सर्वे-छापे के नाम पर व्यापारी समाज को परेशान किया जा रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि व्यापारियों की समस्याओं पर संगठन के प्रांतीय नेतृत्व को वाणिज्य कर आयुक्त कामिनी रतन सिंह ने जीएसटी की दिक्कतों का समाधान कराने का आश्वासन भी दिया जो समय बीतने के साथ खोखला साबित हुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजे ज्ञापन में विभिन्न विभागों के सर्वे-छापों पर तत्काल रोक लगाने, पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी की परिधि में लाने, मंडी शुल्क समाप्त करने, दिल्ली में सीलिंग कार्यवाही पर रोक लगाने, व्यापारियों को दस लाख रुपये दुर्घटना बीमा लाभ देने, ई-वेबिल लागू होने तक जुर्माना की प्रक्रिया पर रोक लगाने आदि मांगों का उल्लेख किया गया है।