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Shahjahanpur News: भाई ने दी धमकी... 12 वर्षीय बहन ने फंदे से लटककर दी जान

Sun, 01 Dec 2024 01:12 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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शाहजहांपुर। माता-पिता की मौत के बाद बुआ के पास रह रही सलोनी (12 वर्ष) ने फंदे से लटककर जान दे दी। सफाईकर्मी पिता की मौत के बाद आठ बच्चों के खाते में एक-एक लाख रुपये आए थे। आरोप है कि एक भाई ने सलोनी के खाते में जमा रुपये निकालने की धमकी दी थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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थाना पुवायां क्षेत्र के गांव बितौनी निवासी राम निवासी पंचायत विभाग में सफाईकर्मी थे। आठ वर्ष पहले पहले उनकी पत्नी छोटी बिटिया की मौत हो गई थी। इसके बाद थाना सिंधौली क्षेत्र के गांव मुड़िया पवार में रहने वाले उसके फूफा कल्लू और बुआ कलावती सलोनी को अपने साथ घर ले आई थीं। कल्लू ने बताया कि चार वर्ष पहले सलोनी के पिता की भी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद फंड आदि से मिले आठ लाख रुपये सभी आठ भाई-बहनों के खाते में बराबर बांटकर डाले गए थे।
कल्लू का आरोप है कि सलोनी का भाई कुछ दिन पहले उससे मिलने आया और कहा कि उसके साथ घर चलो नहीं तो उसके हिस्से के रुपये निकाल लेंगे, तब से सलोनी परेशान थी। बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे कल्लू और कलावती खेत पर गए थे। सलोनी घर में खाना बना रही थी। कुछ देर बाद पड़ोस के लोगों ने खिड़की से देखा कि सलोनी कमरे के अंदर फंदे से लटक रही है। दरवाजा तोड़कर उसको फंदे से उतारा गया। कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया।
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कल्लू के मुताबिक, इसकी सूचना सलोनी के भाई-बहनों को दी गई, लेकिन वे नहीं आए। शुक्रवार शाम तक कल्लू और उनके परिजन इंतजार करते रहे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी सिंधौली महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बालिका के भाई-बहन काफी बुलाने के बाद शनिवार को थाने आए हैं। बालिका के शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए भेज दिया गया है। इस मामले में कोई तहरीर नहीं आई है।
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अकेलापन महसूस करें बच्चे तो करें बात
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. रोहिताश ईशा ने बताया कि कई बार विभिन्न कारणों से बच्चे अकेलापन महसूस करने के कारण गंभीर अवसाद में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब वे अपनी बात किसी से कह नहीं पाते हैं। ऐसे में तनाव में आकर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। परिवार वालों को चाहिए कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ डांट-फटकार का व्यवहार न करें। पहले उन्हें समझाने का प्रयास करें। यदि वे कोई अपनी बात कहना चाह रहे हैं तो उसे गंभीरतापूर्वक सुने और समझने का प्रयास करें।
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