लंबे समय से की जा रही मांग के बाद भी बहगुल और रामगंगा नदी के दोआब में बसे ग्रामीणों के आने जाने के लिए प्रशासन एक नाव मुहैया नहीं करा सका है। बरसाती मौसम में नदी का फाट बढ़ जाने के बाद दिक्कत और बढ़ गई है। प्रशासन की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
मालूम हो कि नगर से करीब पांच किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में बहगुल नदी पार हवा मड़ैया, चितरउ, संगाहा, उइला, थाथरमई, कुंडरा पहाड़पुर समेत लगभग एक दर्जन गांव बसे हुए हैं। इन गांवों के दूसरी तरफ रामगंगा नदी है। रामगंगा पर कोई पुल नहीं है, जबकि बहगुल नदी पर पीडब्लूडी द्वारा हर साल अस्थाई पुल का निर्माण किया जाता है, जिसे बरसात शुरू होते ही तोड़ दिया जाता है। इन गांवों के हजारों लोगों को अपनी जरूरत का सामान अथवा किसी सरकारी काम को निपटाने के लिए कस्बे में आना पड़ता है। गांव वालों द्वारा चार साल पहले चंदे से खरीदी गई छोटी सी नाव नदी में डाली गई जो अब काफी खस्ताहाल है, लेकिन बरसाती मौसम में अब वही नाव लोगों के आने जाने का एकमात्र साधन बनी हुई है।
गांव संगाहे के पूर्व प्रधान बच्चू लाल यादव के अलावा धनपाल, ओमप्रकाश, ध्यानपाल, वीरपाल, राम सिंह आदि ने बताया कि सबसे ज्यादा दिक्कत कस्बे में पढ़ने जाने वाले बच्चों को लेकर है। गांव वालो के अनुसार पहले नदी में पानी कम होने से किसी तरह काम चल जाता था, लेकिन नदी का फाट बढ़ जाने के बाद नाव में बैठना खतरे से खाली नही। इसके बाद भी उसी नाव के सहारे नदी पार करना उन लोगों की मजबूरी है। बताया कि वे लोग कई बार प्रशासन से नई नाव उपलब्ध कराने की मांग कर चुके हैं। गांव चितरऊ निवासी तथा ब्लाक प्रमुख गोपाल वर्मा ने प्रशासन से लोगों के आने जाने के लिए सरकारी नाव उपलब्ध कराए जाने की मांग की है।