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UP: पति की हत्या में दोषी ब्रिटिश पत्नी को मिली मौत की सजा उम्रकैद में तब्दील, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Thu, 02 Oct 2025 03:10 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर

सार

शाहजहांपुर जनपद के गांव बसंतापुर में नौ साल पहले हुए एनआरआई सुखजीत सिंह हत्याकांड में दोषी उसकी पत्नी रमनदीप कौर को बड़ी राहत मिली है। रमनदीप की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौत की सजा आजीवन कारावास में तब्दील कर दी है।
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सुखजीत सिंह और रमनदीप कौर (फाइल) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शाहजहांपुर जनपद के बंडा क्षेत्र के गांव बसंतापुर में नौ साल पहले एनआरआई सुखजीत सिंह की हत्या में दोषी पत्नी रमनदीप कौर को मिली मौत की सजा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में तब्दील कर दी है। वहीं, पत्नी के प्रेमी गुरप्रीत को सुनाई गई उम्रकैद को बरकरार रखा है। 

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रमनदीप कौर और गुरप्रीत सिंह की ओर से शाहजहांपुर के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील की गई थी। इस अपील पर न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह, न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की खंडपीठ ने फैसला सुनाते कहा, वक्त अदालत को कल्पना और पूर्वाग्रह से दूर रहना चाहिए, ताकि फैसला तर्कसंगत हो।

सुखजीत ने साल 2000 में की थी रमनदीप से शादी 
सुखजीत ने जालंधर की मूल निवासी और इंग्लैंड के डर्बी शहर निवासी रमनदीप कौर से सन 2000 में शादी की थी। इसके बाद गुरप्रीत उर्फ मिट्ठू और सुखजीत की पत्नी रमनदीप कौर के बीच प्रेम संबंध हो गए।  सुखजीत की पंजाब के कपूरथला की तहसील सुल्तानपुर लोधी के गांव जैनपुर के मूल निवासी और दुबई में रहने वाले गुरुप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू सिंह से स्कूल के समय से मित्रता थी। 28 जुलाई, 2016 को सुखजीत पत्नी, बच्चों और अपने दोस्त गुरप्रीत के साथ भारत आए थे। देश में कई जगह घूमने के बाद वह 15 अगस्त को अपने बंडा के बसंतापुर स्थित फार्म हाउस पहुंचे।

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ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा-ए-मौत 
दो सितंबर 2016 की सुबह सुखजीत का शव घर की पहली मंजिल पर खून से लथपथ मिला। इस मामले में पुलिस ने रमनदीप और गुरप्रीत को गिरफ्तार किया। आरोप लगाया कि रमनदीप और गुरप्रीत ने मिलकर सुखजीत की हत्या की। ट्रायल कोर्ट ने बेटे की गवाही पर भरोसा जताया। छह अक्तूबर 2023 को रमनदीप को सजा ए मौत सुनाई गई जबकि गुरप्रीत को उम्रकैद। 

रमनदीप की अपील पर सुनाया गया फैसला 
सजा के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने पत्नी रमनदीप को मिली फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी। कोर्ट ने पाया कि यह हत्या संपत्ति विवाद में फंसाने का झूठा मामला नहीं है, बल्कि पत्नी और पारिवारिक मित्र की ओर से अंजाम दी गई सुनियोजित हत्या का है। यह नृशंस है लेकिन दुर्लभतम श्रेणी में तहत नहीं है। लिहाजा, कोर्ट ने पत्नी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली। 
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