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Shahjahanpur News: उफनाई नदियों के पुल बने सुसाइड स्पॉट...कॉपीकैट प्रवृत्ति से बढ़े मामले

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ककरा न्यू सिटी मेें गर्रा नदी के पुल पर न जाने के लिए बाइकसवारों को रोकते पुलिसकर्मी। संवाद
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शाहजहांपुर। बाढ़ से उफनाईं नदियों के पुल सुसाइड स्पॉट बनते जा रहे हैं। हफ्तेभर में कई लोग गर्रा और खन्नौत नदियों के पुल से कूद चुके हैं। कई लोगों को बचाया गया तो कई डूब गए। मनोचिकित्सक के मुताबिक, एक ही अंदाज में लोगों के आत्मघाती कदम उठाने को मेडिकल साइंस में कॉपीकैट सुसाइड कहते हैं। बढ़ते मामलों के मद्देनजर पुलों पर जाल लगवाने के साथ ही प्रेरणादायी संदेश और टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर लिखे होर्डिंग लगाए जाएंगे।
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आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर क्षणिक आवेश में लोग आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। कई बार यह योजनाबद्ध ढंग से अंजाम दिया जाता है।
शहर में गर्रा और खन्नौत नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद एक हफ्ते में कई लोगों ने पुल से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की। इनमें से अधिकतर का पता नहीं चल सका है। हादसों के बाद सक्रिय हुई पुलिस और स्थानीय लोगों ने कइयों को कूदने से बचाया।
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मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि एक ही स्थान से एक जैसे तरीके से कई लोगों के आत्मघाती कदम उठाने की मनोस्थिति को सुसाइड कंटेजन कहते हैं। इसे कॉपीकैट सुसाइड के तौर पर भी जाना जाता है। नदी में कूदकर किसी व्यक्ति के आत्महत्या कर लेने की खबर मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से जब किसी ऐसे व्यक्ति के पास पहुंचती है जो परेशानियों में घिरा हो तो वह इसे आसान तरीका समझकर वैसे ही करने की सोचने लगता है।
पुल से कूदने वाले अपनी पहचान या परिवार तक पहुंचने का माध्यम छोड़कर जा रहे हैं। जैसे कोई चप्पल छोड़ रहा है तो कोई अपनी पत्नी का मोबाइल नंबर लिख रहा है। इससे पता चलता है कि वे कॉपीकैट प्रवृत्ति का शिकार हो रहा है। संवाद

लगाएंगे होर्डिंग, बदलेगी मनोदशा
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम कथानक को बदलें : आशा जगाएं, कार्य करें, है। सीएमओ डॉ. विवेक मिश्रा के मार्गदर्शन में उनकी टीम प्रोजेक्ट उम्मीद चला रही है। इसके तहत शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूल–कॉलेजों में युवाओं के लिए तनाव प्रबंधन व मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाएं आयोजित की जा रहीं हैं। नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संकट–सहायता पोस्टर और टेलीमानस हेल्पलाइन (14416) का प्रचार किया जा रहा है। इसके अलावा पार्षदों व जनप्रतिनिधियों को जोड़कर समुदाय-आधारित सहायता नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। डॉ. अभिनव ने बताया कि पुलों के सुसाइड स्पॉट बनने के कारण वहां पर जाली लगवाने और प्रेरणादायी होर्डिंग-बैनर लगवाने के लिए अनुरोध किया गया है।
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रोकथाम के उपाय
-परिवार और मित्रों के साथ खुलकर बातचीत करें, चुप्पी न साधें।
-समय पर मनोचिकित्सक या काउंसलर से मदद लें।
-तनाव प्रबंधन तकनीक अपनाएं–योग, ध्यान, नियमित व्यायाम करें।
-शराब और नशे से दूरी बनाए।
-संकट में तुरंत सहायता के लिए टेलीमानस हेल्पलाइन 14416 पर कॉल करें।
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