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दो गुट आमने-सामने, पुल का निर्माण रुका

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जलालाबाद के गांव तिकोला स्थित मां काली के मंदिर पर धरने पर बैठे ग्रामीण। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। जलालाबाद तहसील क्षेत्र में शासन द्वारा बहगुल नदी के लिए स्वीकृत किया गया पुल ग्रामीणों की आपसी खींचतान का शिकार हो गया है। पुल निर्माण की जगह को लेकर विरोध होने के बाद निर्माण एजेंसी सेतु निर्माण निगम ने फिलहाल काम रुकवा दिया है। शनिवार को भी अलग अलग स्थानों पर दर्जनों ग्रामीणों ने धरना दिया तो जलालाबाद एसडीएम सौरभ भट्ट ने भी मौका मुआयना किया।
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नगर से करीब आठ किलोमीटर दूर बहगुल नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसको लेकर ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार करने से लेकर कई बार आंदोलन भी किए। मौजूदा सरकार ने ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए पुल को न केवल मंजूरी दी बल्कि इसके निर्माण के लिए धनराशि का भी आवंटन कर दिया। इस महीने के शुरुआत में यहां पहुंचे सेतु निर्माण निगम के कर्मचारियों ने पुल निर्माण का काम शुरू कर दिया। निर्माण एजेंसी ने यह कार्य रामपुर ढकाडाडी को जाने वाले उस रास्ते पर शुरू कर दिया जहां पहले से पैंटून पुल बंधता आ रहा था।
निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों के अनुसार इसी स्थान पर पुल बनवाने की स्वीकृति हुई है। यहां पुल निर्माण का कार्य शुरू होते ही पास के ही गांव उइला, थाथरमई, दुलरामई, हवा मड़ैया समेत अन्य गांवो के ग्रामीणों ने यह कहकर विरोध शुरू कर दिया कि पुल का निर्माण गलत स्थान पर किया जा रहा है। पुल निर्माण की स्वीकृति तिकोला घाट के लिए हुई है। इन ग्रामीणों का कहना था कि इस पुल का निर्माण तिकोला मंदिर के समीप बहगुल नदी पर होना चाहिए। ग्रामीणों की यह बात अनसुनी हो जाने पर इन गांवों के दर्जनों लोग तिकोला मंदिर पर धरने पर बैठ गए। विरोध के चलते बाद में निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के निर्देश पर पुल का निर्माण कार्य रोक दिया गया। निर्माण कार्य रुकते ही जहां पुल बन रहा था, उस क्षेत्र के गांवों के तमाम ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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इसी मामले को लेकर शनिवार को मौके पर पहुंचे एसडीएम सौरभ भट्ट ने पुल निर्माण संबंधी जांच पड़ताल कर इस संबंध में सेतु निर्माण निगम के अधिकारियों से वार्ता की। फिलहाल मामले का कोई हल नहीं निकल सका है। एसडीएम ने बताया कि सेतु निर्माण के अधिकारियों से वार्ता हुई है। 25 फरवरी को एजेंसी की तकनीकी टीम यहां पहुंचेगी और जांच पड़ताल के बाद जो निर्णय लेगी, उसी स्थान पर पुल का निर्माण होगा।
इसलिए पैदा हुई समस्या
शासन स्तर से पुल की स्वीकृति के बाद जो आदेश जारी किया गया है, उसमें रामपुर ढकाडांडी मार्ग पर बहगुल नदी के तिकोला घाट पर पुल निर्माण कराया जाना अंकित है। जहां पर पुल हेतु कार्य शुरू किया गया, वह रामपुर ढकाडांडी मार्ग ही है परंतु वह तिकोला घाट नहीं है। दूसरे पक्ष के ग्रामीण जहां से पुल निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे है, वह तिकोला घाट कहा जाता है। पुल निर्माण की जगह को लेकर आमने-सामने डटे दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। फिलहाल ग्रामीणों की इस खींचतान से पुल निर्माण का मामला अधर में लटक गया है।
बहुत आवश्यक है पुल का निर्माण
शासन ने बहगुल नदी पर जिस पुल को स्वीकृति दी है, विवाद के चलते भले ही उसका निर्माण रुक गया हो परन्तु वह ऐसे क्षेत्र के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों की जीवनरेखा बनेगा। इसकी जरूरत लंबे अरसे से महसूस की जा रही थी। बहगुल नदी के उस पार करीब डेढ़ दर्जन गांव हैं जिनके दक्षिण दिशा में रामगंगा नदी है। वह इलाका मिर्जापुर से जुड़ता है परन्तु आजादी के बाद से इन दोनों नदियों पर पुल नही बन सका। इसके चलते लोगों कोआम दिनों में परेशानी होती ही है। खासकर बरसात के चार महीने ये गांव टापू बन जाते हैं और समूचे क्षेत्र से उनका सम्पर्क कट जाता है। सरकारी योजनाओं के लाभ की बात हो या बच्चो की पढ़ाई-लिखाई या फिर रात के दौरान किसी के बीमार हो जाने का मामला, पुल न होने से लोगो को बुरी तरह परेशान होना पड़ता है।
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