बॉलीवुड के दबंग को हिट एंड रन केस में मुंबई के सेशन कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है। लगभग 13 साल के बाद आए फैसले पर सभी ने लगभग एक जैसी राय ही दी है। किसी ने आश्चर्य व्यक्त नहीं किया और देश की न्याय व्यवस्था का स्वागत ही किया है। लोगों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता। फिर चाहें नेता हो अथवा अभिनेता इससे क्या फर्क पड़ता है। इस बारे में कुछ बुद्धिजीवियों से रायशुमारी की गई तो सभी कानून के पक्ष में खड़ दिखाई दिए।
कोर्ट ने पूरी ईमानदारी से काम किया: बजाज
वरिष्ठ अधिवक्ता जसविंदर सिंह बजाज का कहना है कि हमारे देश की कानून व्यवस्था किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। कुछ मामलों में अपराध की प्रवृत्ति देखी जाती है। यदि अपराधी की प्रवृत्ति गलत नहीं है तो सजा कम भी हो सकती है। सलमान मामले में कोर्ट ने पूरी ईमानदारी से काम किया है।
फिर भी कम मिली सजा: अमीर
प्रधानाचार्य डॉ. अमीर सिंह का मत है कि कानून के मामले में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। उनके हिसाब से तो इस केस को कुछ अधिक लंबा ही खींच दिया गया, जो गलत है। बड़े लोगों पर शिकंजा अधिक कसना चाहिए ताकि लोग उससे सबक ले सकें। ऐसे में सलमान खान की सजा कम हुई है।
कानून की नजर में सब बराबर: हसन
शहर काजी सैयद मसूद हसन कहते हैं कि हमने किसके साथ मदद की और किसको करोड़ों लुटाकर कितनी मदद की, कानून यह नहीं देखता। यह मामला अलग है। शराब पीकर गाड़ी चलाना, किसी को मार देना यदि साबित हुआ है तो उसकी सजा भी होनी चाहिए। इसमें अभिनेता हो या फिर सामान्य व्यक्ति इससे फर्क नहीं पड़ता।
एक संदेश गया है समाज में: पूनम
समाजसेवी पूनम टंडन कहती हैं कि सलमान खान को सजा सुनाकर कोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे देश कानून सभी के लिए एक जैसा है, वह किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। छोटे-बड़े में भेद किए बिना पहले संजय दत्त और सलमान खान को सजा सुनाकर एक संदेश दिया गया है, इस निर्णय का स्वागत होना चाहिए।