जिले में बर्ड फ्लू से बचाव के लिए पशु चिकित्सा विभाग सक्रिय हो गया है। गत एक जनवरी से अब तक पोल्ट्री फार्मों और मीट शॉप से मुर्गियों के मीजल्स और मल के 250 नमूने जांच के लिए भोपाल की सेंट्रल वेटरनरी लैब भेजे जा चुके हैं। गनीमत है कि अभी तक किसी भी सैंपल में बर्ड फ्लू के वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। इसकी रोकथाम के लिए प्रशासन को शासन से गाइड लाइन मिलने का इंतजार है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रमनि चौधरी के अनुसार निदेशालय से मिले निर्देशों के अनुसार मुर्गियों की नाक से निकलने वाले पानी जैसे स्राव (मेजल) और मल के नमूने प्रत्येक माह बरेली के आईवीआरआई भेजे जा रहे हैं। इस वर्ष अब तक ऐसे 250 नमूने भेजे गए, लेकिन अभी तक जो रिपोर्टें मिलीं, उनमें से किसी भी सैंपल में बर्ड फ्लू वयरस की पुष्टि नहीं हुई।
सीवीओ ने बताया कि बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए जिले के पोल्ट्री फार्मों और मीट की दुकानों पर नजर रखी जा रही है। डॉ. चौधरी के अनुसार गंगसरा के पोल्ट्री फॉर्म से भी मेजल नमूने लिए गए हैं। हाल ही में निगोही रोड पर टिकरी के पास अत्याधुनिक रखरखाव की सुविधा से लैस 30 हजार मुर्गी क्षमता वाला पोल्ट्री फार्म खुला है। वहां हाल ही में दस हजार चूजे रखे गए हैं, इसलिए उनके नमूने लेने का अभी कोई औचित्य नहीं है।
बर्ड फ्लू से निपटने को
नहीं हुए कोई इंतजाम
- शासन की गाइड लाइन नहीं पहुंची जनपद में
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। प्रदेश सरकार ने बर्ड फ्लू से निपटने के लिए सभी जिलों के प्रशासन को अलर्ट कर दिया है, लेकिन जनपद के किसी अधिकारी के पास प्रदेश सरकार की गाइड लाइन नहीं आई है। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने बर्ड फ्लू से निपटने के लिए कोई तैयारी शुरू नहीं की है।
स्वाइन फ्लू के बाद बर्ड फ्लू की दस्तक से प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने प्रदेश के सभी जनपदों को अलर्ट कर दिया है। जनपद में अभी तक किसी प्रशासनिक या स्वास्थ्य अधिकारी के पास कोई गाइड लाइन नहीं आई है। सीएमओ डॉ. उमेश सिंह यादव ने बताया कि बर्ड फ्लू से निपटने के लिए शासन की तरफ से कोई गाइड लाइन नहीं मिली है। सीएमएस डॉ. केशव स्वामी ने बताया कि बर्ड फ्लू के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए सोमवार को एक मीटिंग की जाएगी। बर्ड फ्लू के जरूरी दवाई और वार्ड बनाने के लिए जरूरी तैयारियां की जाएगी।
वायरस से फैलता है वर्ड फ्लू
सीएमएस डॉ. केशव स्वामी ने बताया कि वर्ड फ्लू का वायरस एच फाइव और एन वन से फैलता है। यह वायरस पक्षियों में बहुत जल्दी अपना प्रभाव छोड़ता है। इस वायरस की चपेट में आकर पक्षियों के फेफडे़ संक्रमण हो जाता है। पक्षियों के आसपास रहने वाले लोगों में इसका संक्रमण हो सकता है। बर्ड फ्लू से संक्रमित मरीजों को भी टेमी फ्लूू दवाई दी जाती है। इससे संक्रमित व्यक्ति को मास्क लगाकर रहना चाहिए।