इसी गम में परिवार के सदस्य मर जाते हैं। बाद
में युवक भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बन जाता है और अपनी आंखें भी फोड़ लेता
है। इसके बाद उसे प्रभु के दर्शन होते हैं। सुमन पटेल के निर्देशन और
नेहपाल गौतम तथा तारिक खान के सहनिर्देशन में हुए नाटक के मंचन में सुहेल
खान, धर्मेंद्र कुमार, रमीज अहमद, शिवी शर्मा, मोनिका सागर, कुमुद कांत,
इरफान अहमद, जैद खान, संजय, विजेंद्र सिंह शामिल रहे।
मंच की अन्य
व्यवस्थाओं में अभिनय अग्निहोत्री, छोटू, गोपाल, जितेंद्र राणा, दिव्यांशु,
शिवा सक्सेना, पुनीत शर्मा, कोमल सिंह, अनन्या, हृदय नारायण मेहरोत्रा,
आसिफ सलीम, महमूद खान, आशीष शुक्ला, जूही खान आदि का योगदान रहा।