शाहजहांपुर। गो संरक्षण की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए बीडीओ पर गो आश्रय स्थलों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सप्ताह में दो बार उन्हें अपने क्षेत्र की गोशालाओं का निरीक्षण करना होगा।
निरीक्षण की रिपोर्ट सीडीओ को भेजी जाएगी। लापरवाही पर बीडीओ के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीएम ने निर्देश जारी किए हैं। भूसा, चारा और दाना आदि की व्यवस्था कराने में सचिव और प्रधान का सहयोग करेंगे। अगर किसी पशु की मृत्यु हो जाती है तो जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर पशु को सही से दफनाया जाएगा।
गोआश्रय स्थलों में गोवंश को धूप और गर्मी से बचाने के लिए पर्याप्त छाया की व्यवस्था करने के लिए कहा। शेड को गर्म हवाओं के प्रकोप से बचाने के लिए तिरपाल, टाट या बोरे से ढका जाए। गोआश्रय स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में भूसा, हरा चारा और दाना आदि की व्यवस्था की जाए। गोवंश को पीने के लिए स्वच्छ एवं ताजा पानी की व्यवस्था की जाए।
पशु चिकित्साधिकारी पशुओं का समय से उपचार करें। बीमार गोवंश को छायादार स्थानों पर रखकर उपचार किया जाए। गोशाला में आग से बचाव के लिए इंतजाम किए जाएं और फायर स्टेशन का नंबर लिखा जाए।
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जिले में गोवंश की स्थिति
- जिले में निराश्रित गोवंश को संरक्षित किए जाने का लक्ष्य- 9862
- मनरेगा के 73 गो आश्रय स्थल में संरक्षित पशु - 5640
- शहरी क्षेत्रों में 10 अस्थायी गोआश्रय स्थलों पर संरिक्षत पशु- 1214
- सात वृहद गो संरक्षण केंद्रों में पशु- 3624
- जनपद में संचालित दो कान्हा गोशाला में संरक्षित पशु- 625
- जनपद में कुल 92 गोआश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं की संख्या- 11,130
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गो आश्रय स्थलों की स्थिति
- तीन वृहद गो संरक्षण केंद्र कलान का सथरा धर्मपुर, ददरौल का घूरखेड़ा, भावलखेड़ा के दाउदपुर का संचालन।
- तीन वृहद गोसंरक्ष केंद्र घुसगवां, शहबाजनगर और धनुआ खेड़ा का निर्माण।
- छह वृहद गोसंरक्षण गृह के प्रस्ताव भेजे गए।
- आठ अस्थायी गोआश्रय स्थल का मनरेगा की ओर से चल रहा निर्माण।
गोवंशीय पशुओं को ठीक से संरक्षित करने के लिए बीडीओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीडीओ सप्ताह में कम से कम अपने क्षेत्र की दो गोशालाओं का निरीक्षण करेंगे। वहां की व्यवस्थाओं में मदद करने के साथ ही रिपोर्ट बनाकर भेजेंगे। इस कार्य में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अपराजिता सिंह, सीडीओ