सिविल बार एसोसिएशन में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है। बुधवार को एक गुट ने सिविल बार एसोसिएशन का चुनाव होने और पदाधिकारियों के निर्विरोध निर्वाचन संबंधी पत्र जारी कर दिया। वहीं दूसरे गुट ने चुनाव को अवैध बताते हुए कहा कि जो अधिवक्ता खुद को चुनाव अधिकारी बताकर चुनाव कराने की बात कह रहे हैं उन्हें पूर्व में नोटिस जारी किया जा चुका है।
कृष्णानंद अध्यक्ष, ओमपाल बने महामंत्री
पुवायां। सिविल बार एसोसिएशन के लेटर पैड पर चुनाव अधिकारी वकील संजीव सिंह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में बताया गया है कि 29 फरवरी को चुनाव संपन्न होने के बाद अध्यक्ष पद पर कृष्णानंद सिंह राठौर, महामंत्री पद पर ओमपाल सिंह यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए अनिल कुमार सिंह, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए रामरेश सिंह, संयुक्त मंत्री पद के लिए सुनील सिंह, कोषाध्यक्ष पद के लिए सुरेंद्र कुमार, पुस्तकालयाध्यक्ष पद के लिए रामरतन, प्रवक्ता पद के लिए मनीष कुमार मिश्रा के एकल नामांकन के चलते सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जाता है। पत्र की प्रति अध्यक्ष बार कौंसिल उत्तर प्रदेश, सिविल जज पुवायां, एसडीएम, सीओ, तहसीलदार को भेजी गई है। सिविल बार संघ के पूर्व अध्यक्ष सुशील कुमार लल्ला, मनोज कुमार, अंकित शुक्ला, केसी राजपूत, रमन मिश्रा, मनोज पटेल, रामनरेश आदि ने नव निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी है।
चुनाव पूरी तरह अवैध : बृजेश
पुवायां। सिविल बार एसोसिएशन के पैड पर महामंत्री ब्रजेश शुक्ला ने बताया कि सिविल बार संघ के वर्ष 2016-17 के लिए कोई चुनाव नहीं कराया गया है। संजीव सिंह और दीपक पंाडे का चुनाव अधिकारी बताए जाने पर उन्हें 25 फरवरी को नोटिस भी जारी किया जा चुका है। बार कौंसिल को भी सूचना दी जा चुकी है। यदि कोई नव निर्वाचित पदाधिकारी बताता है तो वह अवैध है।
उधर जिस लेटरपैड पर चुनाव अधिकारी संजीव सिंह के हस्ताक्षर से नए पदाधिकारी चयन किए जाने का पत्र जारी हुआ है, उस पर दूसरे चुनाव अधिकारी के रूप में दीपक पांडे का नाम भी लिखा हुआ है। दीपक पांडे ने बताया कि मैं विधिवत चुनाव अधिकारी नियुक्ति नहीं किया गया और मैंने किसी भी नव निर्वाचित पदाधिकारी को प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है।