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बैंकों शाखाआें पर कर्मचारियों, पेंशनरों ने किया हंगामा

Wed, 07 Dec 2016 11:54 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
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बैंक में हंगामा करते लोग।
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नोटबंदी लागू हुए एक माह बीतने के बावजूद बैंक शाखाओं से भुगतान की स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर अवकाश के बाद बुधवार को बैंक खुलने के साथ ही वेतन और पेंशन लेने के लिए कर्मचारियों की भीड़ उमड़ने लगी। कैश की कमी से भुगतान नहीं मिलने पर कर्मचारी भड़क उठे। उन्होंने बॉब की कचहरी ब्रांच और बड़ौदा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की विकास भवन शाखा के समक्ष जमकर हंगामा और नारेबाजी की। 
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चालू माह में वेतन सप्ताह की शुरुआत के दिन मंगलवार से ही बैंक शाखाओं में भुगतान के लिए नियमित खातेदारों के अलावा राज्य कर्मचारियों के पहुंचने से भारी भीड़ उमड़ रही है। तमाम सेवानिवृत्त कर्मचारियों समेत विभिन्न पेंशन योजनाओं के लाभार्थी बुजुर्ग महिलाएं और दिव्यांग भुगतान पाने के लिए बुधवार सुबह नौ बजे से बैंक शाखाओें के आसपास डेरा डालने लगे। बैंकों में भुगतान पाने वालों की इतनी भीड़ उमड़ी कि अन्य कामों से वहां गए लोगों को काउंटरों पर पहुंचना कठिन हो गया। एसबीआई की चौक घंटाघर शाखा के प्रबंधक ने बुधवार को अवकाश दिवस निर्धारित होने के बावजूद बैंक खोले रखी। इससे अधिक भीड़ का नजारा विकास भवन की क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और पुलिस कार्यालय के सामने वाली बॉब शाखा मेें बना क्योंकि इन दोनों शाखाओं में अन्य बैंकों की तुलना में कर्मचारियोें और पेंशनरों के खाते अधिक हैं। ग्रामीण बैंक शाखा प्रबंधक सुरेश चंद्र आर्य ने कैश की कमी देखते हुए वेतन-पेंशन मद में अधिकतम चार हजार रुपये भुगतान कराना शुरू किया। उधर, बॉब कचहरी ब्रांच के मैनेजर ने भी भुगतान की यही पद्धति अपनाई तो कर्मचारी भड़क उठे। उन्होंने विकास भवन बैंक शाखा में मौजूद राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित के नेतृत्व में हंगामा करना शुरू कर दिया। इसकी सूचना बॉब कचहरी ब्रांच पहुंची तो वहां भी लाइन में लगे कर्मचारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विकास भवन में हंगामा करते लोगों को शांत करने की गरज से शाखा प्रबंधक आर्य बाहर निकले तो कर्मचारी नेताओं की उनसे नोकझोंक हो गई। 
हालांकि, बाद में शाखा प्रबंधक आर्य ने बैंक की दिक्कतों का उल्लेख करते हुए कर्मचारियों को शांत किया। उन्होंने कहा कि शाखा को भुगतान के लिए रोज करीब एक करोड़ रुपये की जरूरत है लेकिन मांग की तुलना में दस फीसदी करेंसी मिल रही है। उन्होंने बताया कि बुधवार को बैंक में उपलब्ध करीब नौ लाख रुपये बांटे जा चुके हैं, लेकिन 250 लोगों के विड्रॉल फॉर्म कैश की कमी से रोकने पड़े हैं। अग्रणी बैंक प्रबंधक बीएम गुप्ता के अनुसार भुगतान की स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में करीब एक सप्ताह लग सकता है। 
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गिनती के ही चले एटीएम
नोटबंदी के बाद से जिले के बंद पड़े एटीएम न तो चालू किए जा रहे हैं और न ही उन्हें नए नोटों के लिए अपग्रेड करने का काम हो सका है। इसीलिए 351 एटीएम में से गिने-चुने एटीएम बुधवार को नकदी उगल सके। एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम पर दोपहर बाद से दिन ढले तक लंबी लाइनें लगी रहीं। खास यह है कि कई एटीएम में सौ के नोट खत्म हो जाने के कारण लोगों के हाथ केवल दो हजार का नोट आया। उधर, सदर बाजार के वी मार्ट पर लगे मिनी एटीएम से भी लोगोें को सीमित भुगतान लेने की सुविधा दी गई। 
शिक्षकों ने डीएम से मांगा वेतन भुगतान
प्राथमिक शिक्षक संघ का शिष्टमंडल बुधवार को डीएम राम गणेश से मिला और उन्हें ज्ञापन देकर शिक्षकों को बैंक शाखाओं से वेतन का पूरा भुगतान कराने का अनुरोध किया। संघ के जिला मंत्री देवेश कुमार वाजपेयी और मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी की ओेर से दिए ज्ञापन में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद से बैंक शाखाओं में शिक्षकों को वेतन पाने के लिए अनावश्यक परेशान होना पड़ रहा है। अवकाश लेकर लाइनें लगाने पर भी सिर्फ दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। 
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