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खेतों में बाघ कर रहा आराम...श्रमिकों ने कहा नहीं करेंगे काम

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खुटार। शुक्रवार को गांव हिमचंलपुर के सरकारी नलकूप केे पास गाय को मारने वाला बाघ रविवार सुबह चकरोड पर आराम फरमाता नजर आया तो हड़कंप मच गया। लोगों के शोर मचाने पर बाघ गन्ने के खेत में चला गया।
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नगर के मोहल्ला देवस्थान निवासी रामाधार तिवारी का हिमंचलपुर में खेत है। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह वह दो लोगों के साथ खेत पर जा रहे थे। खुटार के ही मोहल्ला रायटोला निवासी नरेश शर्मा भी पास के अपने खेत पर जा रहे थे। अचानक सामने चकरोड पर बाघ बैठा देख उन लोगों के होश गुम हो गए। वह गिरते पड़ते पीछे की ओर भागे। शोर मचाने पर आस पड़ोस के खेतों में काम कर रहे लोगों ने भी शोर मचाया तो बाघ नरेश शर्मा के गन्ने के खेत में चला गया। गौरतलब है कि इसी बाघ ने शुक्रवार को एक गाय को मार डाला था। इसके बाद से बाघ वहीं पर 50 मीटर के दायरे में ही रह रहा है। वन रक्षक कामता प्रसाद ने मौके पर पहुुंचकर लोगों को खेत से दूर रहने की सलाह दी।
खुटार। रामाधार तिवारी सहित अन्य किसानों का आरोप है कि रविवार सुबह बाघ देखे जाने की सूचना अधिकारियों को देने के तीन घंटे बाद वन रक्षक कामता वर्मा मौके पर पहुंचे और यह कहकर चले गए कि खेतों से दूर रहें। किसानों का कहना है कि उनकी फसल सूख रही हैं। इसका जिम्मेदार कौन होगा? किसानों ने चेतावनी दी कि अगर सोमवार तक विभाग के लोगों ने बाघ को खदेड़ने के प्रयास नहीं किए तो वह धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
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रेंजर साहब! आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं....कह रहे खुद ही जंगल में चला जाएगा बाघ
मानव बाघ संघर्ष हो गया तो कौन होगा जिम्मेदार
रटारटाया जवाब, खुद रखे अपना ख्याल
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां (शाहजहांपुर)। खुटार के पास खेतों में घूम रहे बाघ को देखकर लोग लाठी, डंडे लेकर एकत्र हो रहे हैं, लेकिन खुटार के रेंजर मौके तक जाने की जरूरत नहीं समझ रहे हैं। उनका कहना है कि बाघ अपने आप जंगल में चला जाएगा।
खुटार से एक किमी की दूरी पर खेतों में बाघ ने डेरा जमा रखा है। गन्ने के खेत में गर्मी के कारण कई बार तो बाघ बिना फसल वाले खेतों या चकरोड पर आकर खुले में बैठ जाता है। चार दिन से बाघ का शोर मच रहा है और वनकर्मी भी मान चुके हैं कि गन्ने के खेत में बाघ मौजूद है, इसके बाद भी रेंजर डीएस यादव ने मात्र 15 किमी की दूरी तय कर मौके पर पहुंचने और गन्ने से केवल 100 मीटर दूर जंगल में बाघ को खदेड़े जाने के लिए प्रयास करने की जरूरत नहीं समझी है। ऐसे में बाघ और लोग आमने सामने भी आ सकते हैं। बाघ ने भीड़ में किसी को नुकसान पहुंचाया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
खुटार में बाघ देखे जाने का मामला हो या पुवायां में तेंदुआ देखे जाने का, रेंजर और वनकर्मी एक ही जवाब देते हैं कि बाघ खुद ही जंगल में चला जाएगा। वनकर्मी मौके पर बमुश्किल पहुंचते हैं तो उपदेश देने की शैली में किसानों से खेतों पर अकेले न जाने, खेत में काम करते समय आवाज करते रहने की सलाह देकर खिसक लेते हैं। ऐसा लगता है कि वन्य जीवों के प्रति विभाग की कोई जिम्मेदारी ही नहीं है।
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बाघ देखे जाने की सूचना के बाद वन रक्षक कामता वर्मा को मौके पर भेजा गया है। किसानों को गन्ने से दूर रहने को कहा गया है। बाघ खुद जंगल में चला जाएगा।
डीएस यादव, रेंजर खुटार
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