राजकीय गोसदन में घपलों का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस वर्ष बिना नीलामी के ही साठगांठ कर गोसदन की पतेल को कटवा दिया गया। जबकि पतेल की नीलामी से प्रति वर्ष 20 से 25 हजार रुपये की आय होती रही है।
गांव सिमरा वीरान स्थित राजकीय गोसदन के पास 386 एकड़ जमीन है। फिर भी यहां पल रहे गोवंश की हालत बेहद खराब है। कुछ अधिकारियों के लिए गोसदन कामधेनु गाय की तरह है। गोसदन में भारी रकम का बंदरवांट और जमीन आदि की नीलामी में घपलों का लंबा इतिहास रहा है, लेकिन साठगांठ के कारण कभी भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
गोसदन की सौै एकड़ से अधिक भूमि पर जंगल है। जंगल में और गोसदन की रेतीली भूमि पर फूस और पतेल खूब होता है। प्रति वर्ष इसकी नीलामी 20 से 25 हजार रुपये के बीच होती है। गत वर्ष भी फूस का ठेका 25 हजार रुपये में हुआ था, लेकिन इस वर्ष ठेका किया ही नहीं गया। अधिकारियों की साठगांठ के चलते माफिया ने फूस कटवा ली। इसके अलावा पांच एकड़ के एक प्लाट की भी नीलामी नहीं की गई। इस प्लाट पर लोगों ने बिना नीलामी लिए ही गेहूं की फसल बो दी। बाद में फसल काट भी ला गई। इस प्रकार गोसदन को लगभग दो लाख रुपये की चपत लगी।
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यह सच है कि गोसदन के फूस और पतेल की प्रति वर्ष नीलामी होती है। इससे 20 से 25 हजार रुपये मिलते हैं। इस वर्ष मैंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से कई बार लिखित और मौखिक अनुरोध किया, लेकिन फूस की नीलामी नहीं की गई। पांच एकड़ का कोई प्लाट खाली नहीं पड़ा था। गेहूं आदि की फसल भी नहीं की गई।
डॉ. विवेक शुक्ला (पशुधन प्रसार अधिकारी) राजकीय गोसदन सिमरा वीरान, खुटार