कृपाल के कत्ल के केस में नारायण पांडेय की जिस समय सीजेएम कोर्ट में पेशी चल रही थी उसी दौरान लोगों की भीड़ ने यहां गर्रा नदी के किनारे रुद्रपुर गांव स्थित आसाराम के आश्रम में जमकर बवाल काटा। यह करीब घंटे भर से ज्यादा चला। इस दौरान तोड़फोड़ की गई, सामान को खुर्द-बुर्द किया गया और प्रसाद रूप में वितरण को रखी साहित्य सामग्री आग के हवाले कर दी गई। स्थानीय लोगों से सूचना पाकर सायं करीब साढ़े पांच बजे पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां सिर्फ धुएं का अंबार और कीचड़ में बने भागते लोगों के पैरों के निशान या छूटे हुए चप्पल आदि ही गवाह रूप में शेष थे। रात को पुलिस संदेह के आधार पर रुद्रपुर गांव के तीन युवकों (परमेश्वर दयाल, मोहन और महेंद्र) को पूछताछ के लिए थाने ले गई। ग्रामीणों में इससे नाराजगी का माहौल है।
पुलिस की गाड़ियां पहुंचते ही ग्रामीण और खेतों में काम कर रहे बच्चे भी जुटे, लेकिन कोई भी यह बताने में असमर्थ रहा कि यह सब किसने, कैसे और कब किया। मौके पर पहुंची आरसी मिशन थाना की पुलिस टीम के सदस्य भी पशोपेश में थे कि घटना के बारे में किससे बयान लें। प्रवचन स्थल पर करटेन, पोस्टर, बैनर आदि फटे पड़े थे और बिछी दरी पर कीचड़ भरे पैरों के निशान थे। गेट से घुसते ही दाहिनी ओर स्थित तीन कमरों वाले एक छोटे मकान पर आश्रम लिखा था। यहां बाथरूम का दरवाजा टूटा हुआ था और बाकी के कमरों की खिड़कियां क्षतविक्षत मिलीं। आसाराम का मंदिर तोड़ दिया गया था और उसकी तस्वीर नीचे गिरी थी। इसके पास ही गुलाबी रंग वाले मंदिर नुमा भवन के सभी कमरों के दरवाजे खुले थे इसी के सामने पंफलेट, किताबें, पोस्टर और अन्य प्रचार सामग्री जल चुकी थीं।
दोनों ही मकानों के कमरे से पंखे, इनवर्टर आदि गायब थे। दोनों मकानों के बीच कच्चे फर्श पर जमे कीचड़ से होकर भीड़ के दीवार फांदकर भागने के निशान दिखे। मौके पर पर पहुंचे एसएसआई स्वामी नाथ ने कहा कि पड़ताल की जा रही है। आशंका है कि आसाराम से नाराज लोगों ने यह किया होगा, लेकिन आशंका यह भी है कि कहीं आसाराम के गुर्गों ने सबूत मिटाने के क्रम में तो ऐसा नहीं किया है।
कोतवाली - कोर्ट में पूरे दिन गहमागहमी रही
शाहजहांपुर। आसाराम प्रकरण में गवाह के कत्ल के अभियोग में गिरफ्तार मुख्य आरोपी नारायण पांडेय की कोर्ट में पेशी और पुलिस द्वारा मामले का खुलासा किए जाने के मद्देनजर शनिवार को सुबह से ही सदर कोतवाली और कोर्ट परिसर में खासी गहमागहमी रही। मीडिया वाले भी अच्छी संख्या में दोनों परिसर में जुटे थे। पुलिस सुबह ही गिरफ्तार आरोपी को लेकर कोतवाली से निकल गई तो मीडिया पीछे - पीछे उसका पता लगाते हुए भागी। काफी देर बाद जिला अस्पताल में लोकेशन मिला तो बताया गया कि कोर्ट में पेशी से पहले जरूरी मेडिकल कराया जा रहा है। फिर उसे कोतवाली लाया गया।
हवालात में नहीं, बैरक में था नारायण
शाहजहांपुर। शनिवार को कोर्ट में पेश किए जाने से पहले कोतवाली में नारायण पांडेय पूरी तरह पुलिस की मेहमानवाजी में नजर आया। परिसर में स्थित हवालात में वह नहीं रखा गया था। उसे आरक्षी बैरक में पड़ी चौकियों पर स्थान मिला था। बंद दरवाजे के भीतर ही कागजी कार्रवाई के लिए उसके हस्ताक्षर कराने को दारोगा या सिपाही अनुमति लेकर बैरक में आ-जा रहे थे। वहीं गिरफ्तार आरोपी के साथ रुद्रपुर स्थित आसाराम के आश्रम का सेवादार घनश्याम भी मौजूद था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उसे भी इसी केस में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।