प्रधान पर मूर्ति लगवाने का आरोप
प्रतिमा लगवाने वालों ने बताया कि वे लोग करीब पांच साल पहले प्रतिमा लाए थे। अनुमति न मिलने के कारण प्रतिमा को लगाया नहीं जा सका। आरोप लगाया कि एक माह पहले ग्राम प्रधान अरविंद यादव ने प्रतिमा लगवाने का आश्वासन देकर उन लोगों से करीब 25 हजार रुपये का चंदा इकट्ठा किया। फिर उस जगह पर चबूतरा बनवाकर प्रतिमा स्थापित करवाई।
प्रधान ने आरोपों को नकारा
प्रधान अरविंद यादव ने आरोपों को नकारते हुए बताया कि उनके द्वारा प्रतिमा लगवाने की बात पूरी तरह निराधार है। जिस दिन यह प्रतिमा स्थापित कराई गई, वह रिश्तेदारी में गए हुए थे। सवाल यह है कि सरकारी जमीन पर प्रतिमा लगाई गई, तब प्रधान ने इसकी जानकारी प्रशासन को क्यों नहीं दी, साथ ही बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थान पर प्रतिमा लग जाने की भनक न लगना पुलिस व प्रशासन की शिथिलता को भी दर्शाता है।
प्रतिमा तोड़ने वालों पर कार्रवाई हो
ग्रामीण बलवीर ने कहा कि प्रतिमा क्षतिग्रस्त करने वाले लोग दो-तीन दिन से उसे तोड़ने की धमकी देते घूम रहे थे। उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रतिमा को पुनः उसी स्थान पर लगाया जाए। प्रेमसागर ने कहा कि प्रतिमा लगाने के समय किसी ने विरोध नहीं किया। उसे तोड़ने के प्रयास करने की शिकायत हम लोगों ने पुलिस से की। तब कार्रवाई के बजाए हम लोगों के साथ मारपीट की गई। प्रतिमा को पुनः उसी जगह नहीं लगवाने पर वे आंदोलन करेंगे।
एसपी देहात दीक्षा भांवरे अरुण ने कहा कि राजपुरा नगला में ग्राम प्रधान अवधेश यादव व उसके सहयोगी द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए बिना अनुमति महापुरुष की प्रतिमा रखे जाने की सूचना मिली थी। गांव के लोगों को समझाकर प्रतिमा हटाई गई। ग्राम प्रधान पर एफआईआर दर्ज की जा रही है।