सरकार की मंशा के विपरीत संस्थागत प्रसव कराने में ढिलाई बरतने और डिलीवरी के मानक से कम केस देने वालीं मातृ एवं शिशु कल्याण कार्यकत्रियों (एएनएम) का वेतन रोक दिया गया है। शनिवार को विकास भवन सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गठित जिला स्तरीय स्वास्थ्य सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में सीएमओ डॉ. उमेश सिंह यादव ने सांसद कृष्णाराज को यह जानकारी दी।
दरअसल, बैठक में मौजूद बसपा विधायक रोशन लाल वर्मा और अन्य कई जनप्रतिनिधियों ने सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं होने पर भी प्रसव कराने में टालमटोल करने, जननी सुरक्षा योजना के तहत पर्याप्त भोजन नहीं देने और डॉक्टरों द्वारा फोन नहीं आदि मुद्दे उठाए। साथ ही जानना चाहा कि संस्थागत प्रव संख्या घटने का कारण क्या है। सांसद ने जवाब मांगा तो सीएमओ ने स्पष्ट किया किया कि कम प्रसव कराने वाली एएनएम को चिन्हित कर उनका वेतन भुगतान रोकने की कार्यवाही की गई है।
सीएमओ के अनुसार लक्ष्य के सापेक्ष काम नहीं करने वाली आशा कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की कार्यवाही की जा रही है। डॉक्टरों के फोन नहीं उठाने संबंधी शिकायत पर सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह ने सीएमओ को टीम बनाकर जांच करने के निर्देश दिए। ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पोषण समिति को दी गई धनराशि खर्च नहीं किए जाने के सवाल पर सीडीओ ने स्पष्ट किया कि यह धनराशि कुपोषण मिटाने के लिए डीएम स्तर से गठित संस्था संवर्धन के माध्यम से कुपोषित बच्चों की देखरेख पर खर्च की जाएगी। बैठक में कई ब्लॉक प्रमुख, सरकारी अस्पतालों के प्रभारी डॉक्टर, विभिन्न् विभागों के अधिकारी आदि मौजूद रहे।