प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती को सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए परिवार वाले प्रदेश सरकार की एंबुलेंस सेवा 102 और 108 पर लगातार डायल करते रहे, लेकिन कॉल कभी होल्ड पर तो भी आउट ऑफ रिच मोड में ही रहा। कॉल रिसीव न होने एवं गांव में गरीब परिवार वालों के पास महिला को अस्पताल तक ले जाने का कोई साधन न होने की दशा में घर पर ही प्रसूता ने बच्ची को जन्म दिया और उसके बाद उसकी एकदम हालत बिगड़ गई। थोड़ी ही देर में उसने दम तोड़ दिया। पूरे वाकये को लेकर गांव वालों में रोष व्याप्त हो गया। घटनाक्रम की जानकारी रात तक स्वास्थ्य विभाग को नहीं हो पाई थी।
घटना जलालाबाद क्षेत्र के उस कटरी इलाके के गांव चचुआपुर की है जो कभी कुख्यात बदमाश नरेशा के लिए चर्चा में रहा करता था। जलालाबाद कस्बे से करीब 15 किमी दूर यह गांव बहगुल नदी किनारे है। रविवार सुबह गांव में रामचंद्र की गर्भवती पत्नी सखी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। तुरंत ही परिवारवालों ने 108 नंबर पर डायल किया, लेकिन कॉल होल्ड बताया गया। फिर 102 नंबर पर डायल किया, लेकिन वह आउट ऑफ रिच मोड में रिसपांस करता मिला। इस बीच क्षेत्र की आशा वर्कर गर्भवती के प्रसव पीड़ा की सूचना पाकर रामचंद्र के घर पहुंची और उसने तुरंत सखी को सरकारी अस्पताल ले चलने को कहा, लेकिन कोई साधन न होने के चलते सभी 102 या 108 एंबुलेंस का नंबर मिलने के इंतजार में रहे। इतने में सखी का घर पर ही प्रसव हो गया और बच्ची जन्मी। थोड़ी ही देर में सखी की हालत बिगड़ गई और उसका सांस उखड़ने लगा। जब तक परिवारीजन और आशा वर्कर कुछ समझ पाती कि उसने दम तोड़ दिया। घर में कोहराम मच गया। ग्राम प्रधान सत्यदेव समेत अन्य ग्रामीणों ने इस घटना पर गंभीर रोष जाहिर किया है। रामचंद्र के पहले से पांच संतानें हैं और नई जन्मी बच्ची की हालत सही बताई जा रही है।
सीएमओ मामले की जांच में जुटे
शाहजहांपुर। जलालाबाद के गांव चचुआपुर में रविवार सुबह सरकारी एंबुलेंस वाले नंबर के रिसीव न होने या न मिलने एवं प्रसूता की मौत की घटना पर सीएमओ डॉ. कमल कुमार ने गंभीर संज्ञान लिया है। प्रकरण की अपने स्तर पर जांच शुरू करवाई जा रही है। प्रकरण को गंभीर मानते हुए उन्होंने कहा कि दोनों सरकारी एंबुलेंस वाले नंबरों पर कॉल इतनी देर तक होल्ड होने की बात समझ से परे है। पूरे प्रदेश का नेटवर्क लखनऊ कंट्रोल रूम जुड़ा हुआ है। कॉल वेटिंग पर होने के बाद भी रिसीव हो जाती है और वहां से कॉल करने वाले निकटवर्ती एंबुलेंस चालक को कंट्रोल से सूचना पहुंच जाती है, जिसके आधार पर वह आधे घंटे के भीतर मौके पर एंबुलेंस लेकर पहुंचता है। जलालाबाद वाले मामले में हकीकत क्या रही, यह जांच में सामने आने पर ही कुछ कहा जा सकेगा।