शाहजहांपुर। इंटरमीडियट उत्तीर्ण करने के पश्चात कभी इंजीनियरिंग करने की चाहत रखने वाले विद्यार्थियों की कतार जीएफ कॉलेज में बीएससी गणित पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए लगती थी, लेकिन पिछले तीन वर्ष से पाठ्यक्रम का क्रेज खत्म हो गया है। विद्यार्थी गणित की अपेक्षा जीव विज्ञान को तरजीह दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक पाठ्यक्रम की तरफ रुझान बढ़ा है।
अगस्त महीने में चली प्रवेश प्रक्रिया के बाद जीएफ कॉलेज का परिसर छात्र-छात्राओं से गुलजार हो गया है। बुधवार को दिन में करीब एक बजे कक्षाओं में शिक्षण कार्य चल रहा था। बीएससी संकुल में पहुंचने पर वहां कुछ सेक्शन विद्यार्थियों से भरे थे तो कुछ में सीटें रिक्त थी।
बीएससी गणित के सेक्शन में काफी कम बच्चे थे। प्राचार्य डॉ.मोहसिन हसन खां ने बताया कि 640 सीटों में मात्र 130 ही भर पाई हैं। पहले इंजीनियरिंग समेत कई डिप्लोमा के लिए विद्यार्थी बीएससी गणित को तरजीह देते थे, लेकिन वर्तमान में एआई और कंप्यूटर के चलन की वजह से इंजीनियरिंग का क्रेज कम हुआ है।
इसके चलते बीएससी गणित के प्रति विद्यार्थियों का रुझान डाउन हुआ है। यहीं से कुछ दूरी पर बीएससी जीव विज्ञान की कक्षाएं संचालित थीं। इसका पूरा परिसर भरा था। शिक्षक उन्हें माइक्रोस्कोप के जरिये जानकारी दे रहे थे। प्रोफेसर का कहना है कि 80 से 90 प्रतिशत विद्यार्थियों की हाजिरी कक्षाओं में रहती है।
लंबा इंतजार नहीं, तुरंत नौकरी की चाहत
परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों की काउंसलिंग की गई थी। इसमें सामने आया कि इंजीनियरिंग करने पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी 30 से 40 हजार रुपये प्रति महीने की नौकरी मिल रही है। ऐसे में युवा कंप्यूटर समेत बीबीए, बीसीए आदि को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। कॉलेज में बीबीए, बीसीए और बायो टेक्नोलॉजी की 60-60 सीटें प्रवेश शुरू होते ही भर गईं हैं।
बीएससी गणित में सीटें नहीं भर पाईं हैं। विद्यार्थियों का रुझान इस ओर कम हुआ है। व्यावसायिक पाठ्यक्रम की तरफ छात्र-छात्राओं का रुझान बढ़ा है।
- मोहसिन हसन खां, प्राचार्य-जीएफ कॉलेज
शाहजहांपुर में जीव विज्ञान सेक्शन में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद