शाहजहांपुर। इन दिनों तापमान जिस रफ्तार से बढ़ रहा है उसे देखते हुए खेतों मे तैयार हो रही गेहूं की फसल के उत्पादन में कमी आने के आसार पैदा हो गए हैं। जनपद में प्रति हेक्टेयर 36 से 38 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता है लेकिन तापमान अभी से 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होने के कारण गेहूं का दाना सिकुड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बालियों में अभी दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हुई है। ऐसी स्थिति में ज्यादा गर्मी में गेहूं दाना सिकुड़ने से बचाने के लिए किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई करते रहना जरूरी हो गया है।
बता दें कि जनपद में इस वर्ष 2.67 लाख हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार की गई है, गत वर्ष इन्हीं दिनों अधिकतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस रहा, जिसमे औसतन दो से तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो चुकी है।
इस वर्ष 2.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, 20 हजार हेक्टेयर में आलू, 7800 हेक्टेयर में राई-सरसों और लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मसूर की फसलें बोई गई हैं। तापमान के नजरिए से कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गत जनवरी मेें भी तीन-चार दिन तक अधिकतम तापमान बढ़ने से गेहूं, सरसों, मसूर आदि फसलों की औसत उत्पादकता में कमी की आशंका गहराई थी। बाद में कोहरा पाला का दौर शुरू होने पर गेहूं के लिए अनुकूल हालात बने, लेकिन अब फिर से दिन में पारा असामान्य रूप से उछल रहा है। गत वर्ष 12 मार्च को अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, लेकिन इस वर्ष 15 दिन पहले पारा 30 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है।
प्रतिकूल मौसम में कम हो चुकी गेहूं उत्पादकता
मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि इन दिनों औसत से अधिक तापमान एक सप्ताह तक सीमित रहता है, लेकिन इन दिनों तापमान के लिहाज से मौसम के जैसे तेवर हैं, उन्हें देखते हुए दिन में पारा नीचे गिरने के ज्यादा आसार नहीं हैं और यह हालात फसलों की उत्पादकता के अनुकूल नहीं हैं। दो साल पहले तक जनपद में गेहूं की औसत उत्पादकता 38 से 39 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह चुकी है, लेकिन जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक के अनुसार मानसूनी वर्षा में कमी और मौसम की अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण गत वर्ष गेहूं की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर घटकर 36 क्विंटल रह गई। इस वर्ष मानसून की सामान्य वर्षा हुई, लेकिन तापमान में वृद्धि के कारण गेहूं परिपक्व होने से पहले ही सूख सकता है।
गत वर्ष की तुलना मेें अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस)
तारीख वर्ष 2020 वर्ष 2021
17 फरवरी 26.0 28.5
18 फरवरी 26.0 28.2
19 फरवरी 27.0 27.5
20 फरवरी 26.5 27.8
21 फरवरी 24.3 28.0
22 फरवरी 25.0 28.5
23 फरवरी 26.0 28.5
24 फरवरी 26.0 30.5
25 फरवरी 23.0 30.8
26 फरवरी 25.0 31.2
कृषि और मौसम से जुड़े विशेषज्ञों की बात
फरवरी के अंतिम सप्ताह में तापमान तेजी से बढ़ना रबी फसलों, विशेषकर गेहूं की उत्पादकता के लिहाज से चिंताजनक है। इन दिनों तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए। जल्दी बोए गए अर्ली वैरायटी वाले गेहूं के जिन खेतों की बालियों में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, उनमें दाना सूखकर हल्का पड़ने लगेगा और इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में कमी आ सकती है जबकि शीघ्र पकने वाली प्रजातियां प्रति हेक्टेयर औसत से आठ-दस क्विंटल अधिक उत्पादन देती हैं। मौसम के मिजाज को देखते हुए खेतों में सिंचाई ज्यादा करनी होगी, जिससे कि नमी बनी रहने से गेहूं दाना सूखने नहीं पाए। -डॉ. एनसी त्रिपाठी, वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
इन दिनों अधिकतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना चाहिए, लेकिन उसमें तीन से पांच डिग्री तक अप्रत्याशित वृद्धि हो गई है। वायुदाब में शुक्रवार को हुई भारी कमी के कारण हवा की दिशा बदलने के साथ उसकी रफ्तार भी बढ़ गई है। दिन में तेज धूप के साथ अंधड़ जैसी हवा चलने से गेहूं के साथ गन्ना भी सूखने लगेगा। अगले दो दिन तक मौसम मेें बदलाव के कोई संकेत नहीं हैं। -डॉ. मनमोहन सिंह, मौसम वैज्ञानिक, गन्ना शोध परिषद