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दोबारा हुई बारिश ने किसानों को किया पूरी तरह बर्बाद

Sat, 04 Apr 2015 11:39 PM IST
शाहजहांपुर
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होली के दौरान हुई बेमौसम की बरसात से बरबाद हो चुके किसानों के रहे-बचे अरमान तेज अंधड़ों के साथ हुई दूसरे दौर की बारिश ने धो डाले। हवा के थपेड़ोें की चोट खाकर भीगा गेहूं खेत में पसर गया और उनकी बालियां काली पड़ गईं। शहर से सटे सल्लिया और आसपास के गांवों का रुख करने पर खेतों में चहुंओर फसली तबाही का मंजर बिखरा दिखा। फसली सर्वे के नाम पर खाना-पूरी होने से किसानों में गम के साथ उनका गुस्सा भी जाहिर हुआ।
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शुक्रवार दोपहर अमर उजाला टीम फसली नुकसान का जायजा लेने के लिए मोहम्मदी रोड पर रेलवे क्रॉसिंग से जैसे ही आगे बढ़ी, सड़क के दोनों ओर खेत लहलहाते दिखने के बजाय उजाड़ पड़े मिले। चाहे गेहूं हो या फिर सरसों, सारी फसलें ऐसी दिखीं मानों खेतों में घुसकर नीलगायों ने उत्पात मचाया हो। हथौड़ा और बसुलिया गांव के खेतों की बरबादी पर नजर डालने के बाद हमारी बाइक रोड के बाईं ओर दो किमी लंबा चक रोड नापकर जैसे ही सल्लिया गांव के मुहाने पर पहुंचकर रुकी, वहां सहमे-सिमटे खड़े ग्रामीणों की उत्सुक नजरें बड़ी उम्मीद के साथ हमें निहारने लगीं।
गांव के शिव मंदिर पर गांव के कई लोग खड़े दिखे। उनके पास जाकर जैसे ही फसली नुकसान को लेकर सवाल किया, ग्रामीण राम जुहार करके पास सिमट आए। समवेत स्वर में अपना-अपना नुकसान बयां करके बोले, ‘साब, हमारोे खेत देखऊ चलिके, गेहूं पर आसमानी पटेला चल गओ है। अब आपै को सहारा है।’ फसली सर्वे के बारे में पूछा तो गम में डूबी आवाजों से गुस्सा झलकने लगा।
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पास में खड़े बुजुर्गवारों ने सलाह दी कि उनकी बात पर भरोसा करने के बजाय खुद खेतों में चलकर फसलों का हाल देख लें। गेहूं की बालियों से बिछे एक खेत के पास पहुंचकर उम्रदराज राजीव की आंखें भर आईं। बोले: 15 बीघा में गेहूं बोया, लेकिन अब लागत भी नहीं मिल पाएगी। कोई सर्वे करने आया? ग्रामीणों के समूह में शामिल राजेंद्र सिंह ने सरकारी तंत्र को लानत देनी शुरू कर दी। पास में खड़े सुरेंद्र सिंह बोले कि दस दिन पहले लेखपाल ने खतौनी से दो खेतों के रकबा का मिलान करने के बाद वसुलियां गांव की राह पकड़ ली।

कैसे चलेगा साल भर का घरेलू खर्च
‘हमारे पास गुजर-बसर को सिर्फ एक एकड़ खेत है, उसमें बोया गेहूं पिछली बारिश से गिर गया। अब उसके सूखने का नंबर आया तो बारिश के साथ आंधी ने फिर गिरा दिया। समझ में नहीं आ रहा कि साल भर तक घरेलू खर्चे कैसे पूरे होंगे।’
- प्रहलाद, सल्लिया

अफसर नहीं दे रहे किसानों का साथ
‘इस बार आठ बीघा खेत में गेहूं की बुवाई की थी। पांच क्विंटल गेहूं घर केलिए रखने और बाकी बाजार में बेंचकर खेती पर लिया गया कर्ज चुकाने की सोंची, लेकिन इंद्रदेव रूठ गए। किसानों का अफसर भी साथ नहीं दे रहे।’
- कमल शर्मा, सल्लिया

आंधी-पानी उड़ा ले गया सारे अरमान
‘हमारा चार बीघा गेहूं सलामत रहता तो खाने केलिए अनाज बचाकर घर-गृहस्थी के और कई काम हो जाते। आंधी-पानी ने हमारे सारे अरमान उड़ा दिए। जानवरों के लिए छप्पर डालने का काम भी अब महंगा लगेगा।’
- लल्लू सिंह, सल्लिया

बालियों में नहीं निकल रहा दाना
‘खेत में खड़े गेहूं के पौधों की बालियां तो केवल दिखावटी हैं। सीजन की शुरुआत से चल रही तेज हवा के कारण बालियों में दाना ही नहीं पड़ पाया। जो गेहूं निकल रहा है, उसका आकार भी पिछले साल की तुलना में छोटा पड़ गया है।’
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- राजीव कुमार, सल्लिया
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