शाहजहांपुर। मीरानपुर कटरा के नगर पंचायत अध्यक्ष मुख्तियार अहमद मसूदी को अयोग्य ठहराने के अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि मुख्तियार पर दर्ज मुकदमों के बारे में पहले किसी को जानकारी नहीं थी। चुनाव जीतने के बाद मुख्तियार ने खुद ही कुछ करीबी लोगों से इसका जिक्र किया। कानाफूसी विरोधियों के कानों तक गई और फिर मामला अदालत तक जा पहुंचा। सोमवार को अदालत के आदेश के बाद मुख्तियार को नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा।
2000 में भाजपा प्रत्याशी रहे सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता समीउश्शान को हराकर नगर पंचायत अध्यक्ष बने थे। सुरेंद्र गुप्ता बताते हैं कि मुख्तियार मूलरूप से पीलीभीत के बुजकसावान का रहने वाला है और मीरानपुर कटरा में उसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे। पीलीभीत की थाना कोतवाली में दर्ज चोरी, ऑर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज सात मामलों में अदालत ने उसे दोषसिद्ध भी किया था। बाद में प्रशासन ने उसे जिलाबदर कर दिया।
पीलीभीत में पुलिस की सख्ती के कारण वह मीरानपुर कटरा पहुंच गया। यहां पर वह तकरीबन दस साल पहले समीउश्शान के संपर्क में आया। तब वह उनके घर का कामकाज करता था। 2018 में जब समीउश्शान की पत्नी जमाल फात्मा नगर पंचायत अध्यक्ष बनीं तो उसे स्ट्रीट लाइटों को बंद करने और जलाने के काम में लगा दिया गया।
मुख्तियार के जीवन का टर्निंग प्वाइंट तब आया जब नगर पंचायत की सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई। आरक्षण के कारण समीउश्शान चुनाव नहीं लड़ सकते थे तो उन्होंने मुख्तियार पर भरोसा जताया। समीउश्शान के प्रभाव के कारण कांग्रेस से चुनाव लड़े मुख्तियार 747 वोटों से जीत गया। वहीं, सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता ने अपनी बहू सोनम गुप्ता को भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारा। सोनम गुप्ता 2569 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं।
बताया जाता है कि जीतकर चेयरमैन बनने के बाद मुख्तियार ने अपने ही कुछ लोगों के बीच में बैठकर खुद के ऊपर पूर्व में दर्ज मुकदमों के बारे में बता दिया। यहीं से राज खुल गया। इस बारे में पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता को जानकारी हुई तो वह पीलीभीत पहुंच गए। यहां पर आरटीआई व अन्य स्रोतों से उन्होंने जानकारी जुटानी शुरू की।
15 दिन की मेहनत के बाद उन्हें निर्वाचन पत्रावली में दर्ज मुख्तियार का नाम मिल गया। पीलीभीत में वोटर होने के बावजूद उसने कटरा में भी अपना वोट बनवा रखा था। साथ ही मुकदमों के बारे में जानकारी हो गई। वह सात मामलों में दोषसिद्ध हो चुका था। जिलाबदर भी किया गया था।
इसके बाद पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता की पुत्रवधू और 2023 के नगर पंचायत चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी रहीं सोनम गुप्ता ने साक्ष्यों के आधार पर अदालत का सहारा लिया। चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं फारवर्ड ब्लॉक की प्रत्याशी पूजा कसाना ने भी वाद दाखिल किया। मुख्तियार के अधिवक्ता ने अदालत में यह तर्क रखा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उसके आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य किसी तथ्य पर किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई थी।
इस पर वादी पक्ष के अधिवक्ता ने पूर्व से जानकारी न होने का आधार अदालत में दिया था। सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम आशीष वर्मा ने नगर पंचायत अध्यक्ष मुख्तियार अहमद मसूदी के नामांकन पत्र में आपराधिक रिकॉर्ड छुपाने के कारण चुनाव प्रक्रिया को शून्य एवं अमान्य करते हुए पद रिक्त घोषित कर दिया। अदालत ने चार साल तक मुख्तियार अहमद के किसी भी चुनाव को लड़ने पर रोक लगा दी है।
एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की तैयारी शुरू
मीरानपुर कटरा। मीरानपुर कटरा का नगर पंचायत अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण पूर्व चेयरमैन समीउशशान खां की मदद से अध्यक्ष बने मुख्तियार अहमद मसूदी को ढाई वर्ष में ही पद से हटना पड़ा। मध्यावधि चुनाव की अटकल के बीच प्रत्याशियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि अभी मामला उच्च अदालत में जाने की संभावना है जिसका फैसला आने के बाद ही चुनाव होने की संभावना है। 1952 में मीरानपुर कटरा नगर पंचायत गठित होने के बाद से वर्ष 2023 में पहली बार अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था।
मीरानपुर कटरा नगर पंचायत के पहले अध्यक्ष राजाराम त्रिपाठी 1954 में निर्वाचित हुए थे। 1956 के स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के हाजी जीशान खां राजाराम त्रिपाठी को पराजित करके अध्यक्ष बने थे। वर्ष 1961, 1966, 1971 में कांग्रेस के हाजी जीशान खां अध्यक्ष बने। 1977 से वर्ष 1987 तक तिलहर एसडीएम प्रशासक रहे। 1988 में हुए चुनाव में कांग्रेस के हाजी जीशान खां को पराजित करके गोपाल स्वरूप त्रिपाठी अध्यक्ष बने थे। वर्ष 1989 में नगर पंचायत के सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के द्वारा गोपाल स्वरूप त्रिपाठी को हटा कर सदस्य प्रदीप कुमार जायसवाल को अध्यक्ष बनाया था।
वर्ष 1993 से तिलहर एसडीएम प्रशासक बने। 1995 के नगर पंचायत चुनाव में सपा प्रत्याशी के रूप में समीउश्शान खां अध्यक्ष बने। 2000 में भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता सपा के समीउश्शान को पराजित करके अध्यक्ष बने। 2005 में सपा प्रत्याशी सुकेश कुमार गुप्ता पहली बार अध्यक्ष बने थे। 2010 से 2012 तक तिलहर एसडीएम प्रशासक बने। 2012 से 2017 तक फिर से सुकेश कुमार गुप्ता अध्यक्ष रहे। वर्ष 2018 से 2022 तक पूर्व चेयरमैन समीउश्शान की पत्नी जमाल फात्मा कांग्रेस से अध्यक्ष रहीं। 13 मई 2023 को समीउश्शान खां की मदद से कांग्रेस के मुख्तियार अहमद मसूदी पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट से अध्यक्ष बने।
अदालत का आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
- रजनीश मिश्रा, एडीएम प्रशासन