इसे कहते है कलयुग। हमेशा यही कहा जाता रहा कि कि मकर संक्रांति पर जब सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो सर्दी का प्रकोप कम होना शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार मकर संक्रांति से सर्दी की शुरुआत हुई है। सर्दी होने की उम्मीद छोड़ चुके लोग शनिवार को कंपकंपाते नजर आए। हालत यह थी कि पूरा जिला ही जबरदस्त शीतलहर की चपेट में आ गया। बच्चे-बूढ़े और जवान सभी ठिठुरते ही रहे।
सीजन की पहली सर्दी का सामना रविवार को हुआ। सूर्यदेव भी सेकेंड सटरडे मनाने चले गए। धूप के लिए तरसते लोग सर्दी से कुड़कुड़ाते ही नजर आए। सुबह से लेकर देर रात तक आमजनजीवन अस्त-व्यस्त सा रहा। बाजार की रौनक भी आम दिनों की तरह नहीं दिखाई दी। लोग घरों में दुबके रहे और ग्राहकों की प्रतीक्षा में दुकानदार ब्लोअर तथा अंगीठी का सहारा लिए सर्दी में गर्मी की तलाश करते रहे।
रेलवे स्टेशन, रोडवेज, जिला अस्पताल, बरेली मोड़ जैसे स्थानों पर यात्री और मरीज और उनके तीमारदार सर्दी से ठिठुरते देखे गए। सर्दी का अवसर पशु-पक्षियों में दिखाई दिया। अचानक चली शीतलहर से लोगों को गरम कपड़े पहनने के लिए मजबूर होना पड़ा। मौज-मस्ती में दिन काट रहे लोग शनिवार को कपड़ों में लैस नजर आए।