तिलहर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय में नए शिक्षा सत्र में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीए और बीकाॅम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों की कक्षाएं शुरू हो गईं हैं। बावजूद इसके कई विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त होने से इस वर्ष भी दोनों पाठ्यक्रमों में तमाम सीटें खाली रह गईं हैं।
महाविद्यालय में हिंदी, वाणिज्य, समाजशास्त्र, संस्कृत, लाइब्रेरी साइंस, खेलकूद आदि विषयों के शिक्षक नहीं होने से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
वर्तमान में महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ. सरन पाल सहित सिर्फ तीन शिक्षक हैं। राजनीति विज्ञान के व्याख्याता नरेश पाल और अंग्रेजी विषय की व्याख्याता शशि कक्षाएं ले रहीं हैं। गत वर्ष कॉलेज में बीए की 480 में 270 और बीकाॅम की 80 में 29 सीटों पर काफी प्रयास से प्रवेश हुए। इस बार भी विद्यार्थी संख्या बढ़ाने के लिए कॉलेज प्रशासन ने काफी प्रयास किए।
तब कहीं जाकर बीए में 293 और बीकाॅम में 34 प्रवेश हो सके हैं। हालांकि, बीते वर्ष की तुलना में विद्यार्थी संख्या बढ़ी है, लेकिन बीए की 187 और बीकॉम की 46 सीटें रिक्त रह गईं हैं।
कॉलेज परिसर के मंदिर में तांत्रिक क्रियाओं से पढ़ाई बाधित
महाविद्यालय परिसर में स्थित मंदिर में तांत्रिक क्रियाएं कराए जाने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित होने के साथ ही उनमें भय पैदा हो रहा है। प्राचार्य ने इस बारे में शासन-प्रशासन को अवगत कराकर कॉलेज के मंदिर में तांत्रिक क्रियाओं पर रोक लगाने की गुजारिश की, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। माना जा रहा है कि इस वजह से भी कॉलेज में सीटें नहीं भर सकीं हैं।
बीए पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया है, कॉलेज में बंदरों की भरमार है। उन्हें भगाने का प्रयास करने पर वह आए दिन काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं। इस संबंध में कदम उठाने की जरूरत है।
-छाया
बीए में प्रवेश लेने के बाद रोजाना कॉलेज आती हूं। कॉलेज के मंदिर में तांत्रिक क्रियाएं होने से महिलाओं के चिल्लाने की आवाजें डर पैदा करने के साथ पढ़ाई से ध्यान हटा देती हैं। जरूरी है कि इस पर रोक लगे।
-मनु
कई विषय प्राध्यापकों के रिक्त पदों के बारे में उच्च शिक्षा निदेशालय को कई बार अवगत कराया जा चुका है। शिक्षकाें की कमी से परंपरागत पाठ्यक्रमों के लिए भी पर्याप्त प्रवेशार्थी नहीं मिल सके हैं। कॉलेज परिसर के मंदिर में एक बाबा के तंत्र-मंत्र करने के दौरान महिलाओं के चीखने से छात्राएं डर जाती हैं। इससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है। कई बार शिकायत की, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।
-डॉ. सरन पाल, कार्यवाहक प्राचार्य, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय डिग्री कॉलेज
तिलहर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं को पढ़ाते शिक्षक। संवाद- फोटो : mathura
तिलहर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं को पढ़ाते शिक्षक। संवाद- फोटो : mathura