कुल मिलाकर पुलिस, पालिका और अतिक्रमणकारियों के बीच आम नागरिक पिसने को
मजबूर है। स्कूली बच्चों की छुट्टी के बाद तो चौराहे से निकलना बेहद दुष्कर
हो जाता है। एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं जाम में फंसने से रोगियों की
जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। नगर के सौंदर्यीकरण के साथ साथ यातायात
व्यवस्था को सुचारू करने के लिए जरूरी बंदोवस्त करने की भी जरूरत है।
छोटे
कस्बों में यातायात पुलिस की कोई व्यवस्था लागू नहीं है। नागरिक पुलिस के
ही कर्मियों को हाईवे पर लगाया जाता है। सूचना मिलने पर नगर में भी पिकेट
के सिपाहियों से ही यातायात व्यवस्था के सुचारू करने का प्रयास होता है।
अरूण कुमार सिंह, कोतवाल तिलहर