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मौत का शाॅर्टकट : एक किमी का फेर बचाने में चली गई पांच लोगों की जान

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शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद - फोटो : katra news
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शाहजहांपुर। एक किलोमीटर का फेर बचाने के प्रयास में रोजा रेलवे स्टेशन पर पावर केबिन के सामने रेलवेकर्मियों की सुविधा के लिए बनी क्रॉसिंग से गुजरते समय बाइक सवार पांच लोगों की जान चली गई। 110 प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही रन-थ्रू गरीब रथ एक्सप्रेस के इंजन की टक्कर लगने से बाइक के परखचे उड़ गए। पांचों लोगों के शव बुरी तरह क्षतविक्षत अवस्था में मिले।
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रेलवे स्टेशन के पास ही गेट संख्या 317 को रेलवे कर्मचारियाें की आवाजाही के लिए बनाया गया है। गेट पर अप और डाउन की पटरी के साथ लूप लाइनें भी हैं। सामान्य तौर पर इस गेट से आमजन को आने-जाने पर रोक होनी चाहिए, लेकिन रेलवे अफसरों की लापरवाही के कारण लोग इसे शाॅर्टकट के तौर पर अपनाते हैं।
रोजा ओवरब्रिज से होकर गुजरने में लगभग एक किमी का फेर पड़ जाता है। बुधवार की शाम को हरिओम, सेठपाल, पूजा व उनके दो बच्चे बाइक से रवाना हुए तो रोजा बस अड्डे से रैक प्वाइंट की ओर जाने के लिए एक किमी का फेर बचाने के लिए रोजा में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पटरी पर पहुंचने पर हरिओम व सेठपाल को दूर से रन-थ्रू ट्रेन आती दिख गई, लेकिन बाइक सवार समझ नहीं पाए कि गाड़ी कौन-सी लाइन पर आएगी। इस बीच तेज गति से आई ट्रेन के इंजन से बाइक में जोरदार टक्कर लगी और बाइक के परखचे उड़ गए।
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अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था हरिओम
उचौलिया (लखीमपुर खीरी)। शाहजहांपुर के रोजा में हुए हादसे में जान गंवाने वाला बनका गांव निवासी हरिओम अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। उनकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
हरिओम बुधवार शाम को अपने साढ़ू के साथ उचौलिया आ रहे थे। इस दौरान रोजा रेलवे स्टेशन के पास रेल लाइन पार करते समय ट्रेन से टकराकर हादसा हो गया। गांव के लोगों ने बताया कि हरिओम बनका गांव में अपनी ननिहाल में रहते थे। उनसे बड़ी एक बहन है, जिसका विवाह हो चुका है। दो छोटी बहने हैं, जो पिता लालाराम के साथ रोजा में रहती हैं। हरिओम का एक बेटा है जिसकी उम्र करीब दो साल है। शाम को जैसे ही हादसे में हरिओम की मौत की खबर यहां आई तो कोहराम मच गया। हालांकि उनकी गर्भवती पत्नी आरती को घटना के बारे में काफी देर तक नहीं बताया गया।
हरिओम के पिता लालाराम उचौलिया क्षेत्र के ही गांव सिसोरा सहमत के रहने वाले थे। बनका गांव में करीब 25 साल से रह रहे थे। हालांकि कुछ समय पहले से लालाराम, उनकी पत्नी माया व दो बेटियां रोजा में रहने लगे थे, मगर हरिओम बनका गांव में ही पत्नी और बच्चे के साथ रहते थे। हादसे की खबर मिलने पर बनका गांव से रिश्तेदार शाहजहांपुर के लिए रवाना हो गए।
भाई की भी हादसे में गई थी जान
हादसे में जान गंवाने वाले हरिओम के बड़े भाई दीपक की मौत भी हादसे में हुई थी। करीब दस साल पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भिटारा थाना रोजा में साइकिल सवार दीपक को ट्रक ने टक्कर मार दी थी।

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

शाहजहांपुर के रोजा में हादसे के बाद स्टेशन के प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते परिजन। संवाद- फोटो : katra news

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