23 अगस्त 1986 को तिलहर के मोहल्ला पक्का कटरा निवासी ओमप्रकाश रस्तोगी अपने मुनीम गंगादीन के साथ रिक्शा से अपनी सराफा की दुकान में जा रहे थे। वह सुनारी के कार्य में इस्तेमाल होने वाला तेजाब भी लिए हुए थे। उनका राजेश से प्रॉपर्टी को लेकर मोहल्ला पक्का कटरा निवासी राजेश उर्फ राजू से विवाद चल रहा था।
रास्ते में उन्हें राजेश मिला और दोनों के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हो गई। राजेश ने तेजाब छीनकर गंगादीन और ओमप्रकाश पर फेंक दिया। इसमें ओमप्रकाश गंभीर रूप से झुलस गए थे। मुनीम गंगाधीन भी झुलसे थे।
28 अगस्त को ओमप्रकाश के बेटे संजय कुमार ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 30 मई 1988 को न्यायालय ने राजेश उर्फ राजू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसने उच्च न्यायालय में अपील दायर की और जमानत पर छूट गया था। वह 1988 के बाद से ही फरार हो गया। सजा से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा।
वह पहले लखीमपुर खीरी के गोला में किराए के मकान पर रहा। फिर मोहल्ला कपूरथला में खुद का मकान बनाकर रहने लगा। पुलिस को उसका पता न चले, इसके लिए वह विभिन्न राज्यों के धार्मिक स्थलों पर दो-तीन माह रुककर अपनी जगह बदलता रहा।
वर्तमान में वह मध्य प्रदेश के जिला शिवपुरी के ककरौआ स्थित गायत्री शक्ति पीठ पर बाबा के भेष में रह रहा था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। राजेश ने अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था जिससे पुलिस को उसके बारे में सुराग लग गया।
पुलिस मध्य प्रदेश पहुंची और उसे गिरफ्तार कर ले आई। एसपी राजेश द्विवेदी व एसपी ग्रामीण भंवरे दीक्षा ने टीम को शाबाशी दी। एसपी ने बताया कि एसओजी व सर्विलांस टीम की मदद से मध्य प्रदेश में रह रहे आरोपी राजेश उर्फ राजू को पकड़ा गया है। जब वह भागा था तब उसकी उम्र तकरीबन 21 साल थी। अब आरोपी की उम्र 58 साल है।