अस्थायी रैन बसेरे बने नहीं, ठंड में ठिठुर रहे लोग
पूस की कड़कड़ाती सर्दी में लोग खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं। इनमें से कुछ लोगों को रैन बसेरों के बारे में जानकारी नहीं है तो कई लोग आधार कार्ड न होने से इनमें प्रवेश से वंचित हैं। सरकारी व्यवस्था के नाम पर सिर्फ अलाव जल रहे हैं। बृहस्पतिवार रात की गई पड़ताल में यही हकीकत सामने आई। सेटेलाइट बस अड्डे पर अस्थायी रैन बसेरा अब तक नहीं बना है। बस अड्डे पर लोग खुले में सोते दिखे।
नगर निगम के रैन बसेरे का हाल ठीक मिला, पर उसके बाहर भी लोग खुले में सोते दिखे। नगर निगम के जलकल विभाग के नीचे रिक्शे पर भी कुछ लोग सो रहे थे। पुराने बस अड्डे पर भी लोग खुले में सोते मिले। रिठौरा की तुलसीया और पास बैठी रामप्यारी एक पतले कंबल में लिपटी थीं। बताया कि उनके पास आधार कार्ड नहीं है, इसलिए कोई उन्हें रैन बसेरे में जगह नहीं देता है। रेलवे स्टेशन पर भी रात 11 बजे लोग खुले आसमान के नीचे व प्लेटफाॅर्म पर सोते मिले। इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।