लाखों रुपये की संपत्ति बाढ़ की भेंट चढ़ी
- मौसम की पहली बाढ़ में ही सबसे अधिक नुकसान गांव मौजमपुर और पहरूआ बड़ा में हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
मिर्जापुर। रामगंगा का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। नालों के सहारे खेतों और गांवों में भरा बाढ़ का पानी नदी में लौट रहा है। नदी के घटने के साथ ही गांव मौजमपुर व पहरूआ में भू-कटाव भी तेज हो गया है। लोग अपनी घर गृहस्थी के साथ ही तोड़े गए मकान की ईंट, दरवाजे, सरिया आदि सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
मौसम की पहली बाढ़ में ही सबसे अधिक नुकसान गांव मौजमपुर व पहरूआ बड़ा में हुआ है। गांव के विनोद वर्मा ने कहा कि मकान बनवाने में कभी इतने लेबर नहीं चले जितने जेसीबी से मकान तोड़ने में। हर साल बाढ़ और सूखे की स्थिति से निबटना इस क्षेत्र के लोगों की नियति बन गई है। रामगंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ से किसान बर्बाद हो गया है, तो बारिश न होने से बने सूखे के हालात से किसान पंपसेट से खेतों में पानी भरकर धान की रोपाई करते हैं। नदी से दूर के किसानों में भी बाढ़ का भय सता रहा है। भारी लागत और मेहनत से तैयार की जा रही धान की फसल कहीं दुबारा बाढ़ के आ जाने से नष्ट न हो जायें। हालांकि मिर्जापुर, कुतुलूपुर, गुलड़िया, इस्माइलपुर आदि गांवों की काफी फसलें इसी बाढ़ में डूबने से नष्ट हो गईं हैं।
वर्षों से बाढ़ से बचाव के लिए इस क्षेत्र के लोग धरना-प्रदर्शन जनप्रतिनिधियों और जिले के आला अफसरों के द्वार खटखटा चुके हैं, किंतु किसी ने भी आश्वासन के सिवाय बाढ़ से बचाव के लिए कुछ भी नहीं किया है। इस बार भी जिले के अफसर बाढ़ क्षेत्र के भ्रमण के नाम पर पिकनिक जैसा आनंद लेकर लौट गये।