- कर्मचारियों के पास नहीं है बिजली लाइनों से बचाव के उपकरण
- जिन कर्मियों के पास हैं भी उपकरण वह प्रयोग लायक नहीं बचे
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। विद्युत विभाग के ट्रांसफार्मर खराब होने पर उनकी मरम्मत करने, लाइनों में फॉल्ट होने, टूटकर गिरने आदि कामों को फटाफट करके बिजली सप्लाई शुरू करके शहरवासियों को सुविधा पहुंचाने वाले बिजली विभाग के कर्मी अपनी जान को जोखिम में डालकर काम कर हैं। कई कर्मचारियों के पास तो विभाग से मिलने वाले उपकरण ही नहीं है, वहीं जिनके पास हैं भी तो वो प्रयोग में लाने लायक नहीं बचे हैं।
आपको इन तथ्यों की हकीकत जाननी हो तो शहर में घूमते वक्त या आस-पड़ोस किसी लाइन या ट्रांसफार्मर में खराबी आ जाए, तो वहां आने वाले कर्मचारियों को काम करते वक्त देखना कि उनकी सुरक्षा के कितने उपकरण उनके पास मौजूद हैं। उसके बाद उन कर्मचारियों से उन्हें मिलने वाले उपकरणों के बारे में पूछताछ भी कर सकते हैं।
बहादुरगंज क्षेत्र में कार्यरत एक विभागीय कर्मचारी ने बताया कि लाइन सही करते वक्त, प्लास, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट, रिंच, पाने, अर्थ चेन, सीढ़ी, सीढ़ी ढोने वाला चक्का आदि की जरूरत होती है, लेकिन इन सबकी व्यवस्था तो खुद ही करनी होती है। क्योंकि इन उपकरणों के बगैर खतरा बना रहता है।
वहीं साथ में खड़े एक संविदा कर्मचारी ने बताया कि ट्रांसफार्मर एवं विद्युत लाइन खराब होने पर एवं अधिकारी फोन करके उसे सही करने के आदेश तो तुरंत दे देते हैं, लेकिन ठेकेदारों से जब उपकरणों की मांग करते हैं, तो टहला दिया जाता है। बोले कि फटे हैंड ग्लव्स, बगैर टार्च, टूटी हुई सीढ़ी के सहारे काम चलाया जा रहा है। नौकरी के लिए रिस्क तो लेना ही पड़ता है।
गोविंदगंज क्षेत्र के बिजली विभाग के जेई केपी सिंह ने बताया कि उन्होंने एक महीने पहले ही ज्वाइन किया है। अंतिम बार कब इन उपकरणों का वितरण किया गया था, इसकी जानकारी तो नहीं है, लेकिन उपकरण खराब हो जाने पर उन्हें बदल दिया जाता है।
‘विद्युत विभाग के कर्मचारियों के पास सभी ट्रांसफार्मर एवं लाइन सही करने के अधिकांश उपकरण मौजूद रहते हैं। संविदा कर्मियों के पास उपकरणों की क्या स्थिति यह नहीं मालूम क्योंकि उन्हें उपकरण देने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है।’
- एके शुक्ला, अधिशासी अभियंता, नगर