युवाओं की बेरुखी से बर्बाद हो रहा पानी
पीयूष दुबे
शाहजहांपुर। धरा की अमूल्य जल संपदा को कैसे बचाया जा सकता है, यह जानने के लिए युवाओं में जरा भी रुचि नहीं है। हालांकि कुछ युवा चिंतित जरूर दिखे, लेकिन उनकी चिंता केवल चर्चा और कार्यक्रमों तक ही सीमित थी। यहां ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सुझाव देने के अलावा उन्होंने कोई बात ऐसी नहीं कही कि जिससे लगे कि वह वास्तव में पानी खुद तो बचाना चाहते ही हैं साथ ही अपने संगी-साथी से ऐसा करवाएंगे।
युवाओं में जगाना होगा
पानी बचाने का जज्बा
‘पानी कैसे बचाना है, यह बात युवा जानते हैं, लेकिन अपनी दिनचर्या में बदलाव न करने की वजह से उस पर अमल नहीं करते हैं। युवाओं में अगर पानी बचाने का जज्बा आ जाए तो पानी को काफी हद तक बचाया जा सकता है।’
- अवनीत शुक्ला, मेडिकल स्टोर संचालक
कैंट एरिया में लगे हैं
वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट
‘बारिश के पानी का संचयन करने के लिए छावनी क्षेत्र में कई वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाए गए हैं। हैंडपंपों से लोग जरूरत पर ही पानी भरते हैं। इससे पानी बर्बाद होने से काफी हद तक रुका है। युवा जल बचाने को लेकर गंभीर नहीं है।’
- गजेंद्र सिंह गंगवार, पूर्व उपाध्यक्ष कैंट बोर्ड
पानी बचाने को आगे
आई अभाविप
‘विद्यार्थी परिषद की ओर से जल को बचाने के लिए लोगों को जागरूक किया गया। संगठन से जुड़े अधिकांश विद्यार्थी जहां भी पानी की बर्बादी देखते हैं, उसे रोकने का प्रयास करते हैं। जल संरक्षित करने के लिए कालेजों में जाकर लोगों को बताते हैं। ’
- राजकमल वाजपेयी, विभाग संयोजक, अभाविप
कुछ युवाओं में है जल
संरक्षण की ललक
‘युवाओं में पानी को बचाने की ललक है। वह इसको लेकर कार्यक्रम भी करते हैं। स्टैंड पोस्ट पर टोंटियां न लगी होने की वजह से लाखों लीटर पानी रोजाना बह जाता है। इस पर रोकथाम लगे, इसके लिए पिछले दिनों डीएम को ज्ञापन भी दिया था।’
- राधे मिश्रा, इंटर कॉलेज संचालक
जिले में पानी बचाने को समर्पित हैं संस्थाएं
शाहजहांपुर। भागम भाग वाली जिंदगी में जहां लोग सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के बारे में सोचते ही नहीं हैं, वहीं जिले में कुछ संस्थाएं और लोग जल संरक्षण को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। ऐसे ही कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने जल संरक्षण करने के प्रयासों के बारे में बताया।
संचयन ने जल संरक्षण
को बढ़ाई जागरूकता
‘संचयन’ संस्था के अध्यक्ष डॉ. स्वप्निल यादव का कहना है कि उनकी संस्था ने पानी बचाने को लेकर न सिर्फ जागरूकता अभियान चलाए, बल्कि खुद भी उसे जीवन में ढाला। नदियों को प्रदूषण से बचाने और नदियों के पानी को संरक्षित करने के लिए प्रदूषण रिपोर्ट भी तैयार की है।
दूषित पानी का भी
सदुपयोग सिखाया
देश की प्रमुख आरओ प्लांट निर्माण कंपनी यूरेका फोर्ब्स के राजस्थान में एरिया सेल्स मैनेजर रहे अमित त्यागी ने बताया कि उन्होंने आरओ से पानी शुद्घ करने के बाद बचने वाले दूषित पानी को भी पौधों की सिंचाई करने, बर्तन, कपड़े धोने जैसे कामों में प्रयोग करके पानी बचाने के बारे में बता लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक किया।
दिन में मोमबत्ती जलाकर किया विरोध
पर्यावरण की रक्षा को सक्रिय संस्था ‘पृथ्वी’ के डॉ. विकास खुराना का कहना है कि उनकी संस्था की ओर से मोहल्लों में नुक्कड़ गोष्ठियां करके लोगों को जागरूक किया। नगर पालिका की पाइप लाइनों से पानी बर्बाद होने के विरोध में दिन में मोमबत्ती जलाकर विरोध जताया गया। वहीं पानी को शुद्ध करने वाली तुलसी की एक लाख पौध वितरित की गई है।
नियमित रूप से
लोगों में लाई
जाए जागरूकता
परिषदीय स्कूलों से लेकर, इंग्लिश मीडियम, कान्वेंट, इंटर कालेज, डिग्री कालेजों में तमाम जागरूकता अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी पानी को नहीं बचाया जा पा रहा है, क्योंकि लोगों अपनी पानी बर्बाद करने की आदतों में सुधार नहीं लाना चाहते हैं। जागरूकता कार्यक्रम केवल तभी होते हैं, जब जल संरक्षण सप्ताह, पखवाड़ा या दिवस मनाया जाता है। ऐसे कार्यक्रमों के नियमित रूप से संचालित न होने की वजह से पानी को नहीं बचाया जा पा रहा है।
अभिभावक इंदु अजनबी का कहना है कि स्कूल-कॉलेजों में केवल वर्ष में कुछ ही दिन इन महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया जाता है, जबकि जल संरक्षण के बारे लगातार जागरूक करने की जरूरत है। कर्नल एकेडमी की निदेशक नीला चौधरी का कहना है कि बच्चे स्कूलों में पानी बचाना सीखते हैं, लेकिन घरों में इसके अनुकूल माहौल न पाकर वे इसे अपनी दिनचर्या में ढाल नहीं पाते हैं। इससे पानी के बचाने के प्रयास धरे रह जाते हैं।
बच्चों में है पानी बचाने की ललक
शहर के एक कान्वेंट स्कूल के बच्चों ने जल संरक्षण को लेकर विभिन्न मॉडल तैयार किए हैं। साथ ही उनसे पानी कैसे बचेगा, इस बारे में भी वह बेबाकी से बताते हैं। ऐसी ही एक छात्रा रिया मोहन ने बताया कि वह घर में भी पानी को बचाती है। बोलीं कि पानी को अगर अभी न बचाया गया तो आगे पीने के लिए भी पानी मुश्किल से मिलेगा। वहीं कक्षा चार में पढ़ने वाले छात्र शौर्य कहते हैं कि पानी की हर बूंद कीमती है, इसे बचाया जाना चाहिए, तभी जल संरक्षित हो पाएगा।