फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आरोपी विपिन ने किया ‘सरेंडर’

Thu, 27 Mar 2014 05:33 AM IST
Shahjahanpur
विज्ञापन
विज्ञापन
बाडूजई में ऑनरकिलिंग का मामला
विज्ञापन

- बोला, दोस्ती में दगाबाजी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था मैं
- बहन को दोस्त के साथ कमरे में देखकर आवेश में उठाया कदम
- सचिन को पुराने विवाद के चलते बनाया निशाना
- दोनों तमंचे और कारतूस अखिलेश से मिले थे विपिन को
- कारतूस खत्म न होते तो अपने भी गोली मार लेता
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। बाडूजई मोहल्ले के एक मकान में रविवार को बहन प्रियंका सक्सेना और दोस्त अखिलेश यादव उर्फ चंचल को मारने के बाद फरार हुए विपिन को गिरफ्तार करने में आखिरकार पुलिस कामयाब हो गई। बहनोई और अन्य रिश्तेदारों को थाने में बैठाने से विपिन पर ऐसा दबाव बना कि उसने मंगलवार रात थाने में सरेंडर कर दिया। हालांकि पुलिस ने उसे खुद गिरफ्तार करना दिखाया है, पुलिस ने उसे जेल भेज दिया। पुलिस हिरासत में विपिन ने कहा कि वह अपने दोस्त अखिलेश की दगाबाजी को बर्दाश्त नहीं कर पाया। इसलिए उसने अखिलेश के साथ ही उससे संबंध बनाने वाली अपनी बहन को मार डाला। सचिन को इसलिए गोली मारी क्योंकि बहन को लेकर ही उससे भी पहले झगड़ा हुआ था। जब वह सामने पड़ गया तो गोली चला दी। विपिन का कहना है कि यदि गोली बची होती तो वह अपने भी मार लेता।


सगे भाई से ज्यादा मानता
था, मगर हुआ विश्वासघात
पुलिस के मुताबिक विपिन अपने सगे भाई से ज्यादा अपने दोस्त अखिलेश उर्फ चंचल पर विश्वास करता था। 26 फरवरी को विपिन के बड़े भाई संतोष की पत्नी प्रीति ने शाहजहांपुर जिला अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था। दिल्ली में नौकरी करने भाई संतोष को तब छुट्टी नहीं मिल पाई थी। इस स्थिति में विपिन ही मां सुखदेवी के साथ अस्पताल की भाग दौड़ी कर रहा था। पिता ओसीएफ में ड्यूटी पर रहते थे। घर पर अकेली रह जाने वाली बहन प्रियंका का ध्यान रखने के लिए उसने अखिलेश से कह दिया था। विपिन का कहना है कि इसी दौरान अखिलेश ने दगाबाजी की, यह स्थिति वह भांप गया और जब अपनी आंखों से दोनों को एक कमरे में देखा तो तमंचा उठा लाया। यह तमंचा उसी कमरे में पड़े बेड में रखा था, जिस कमरे में उसने अखिलेश पर गोली चलाई। बोला-दोस्त के विश्वासघात को कतई बर्दाश्त नहीं कर पाया और दोस्ती को भुला दिया।
विज्ञापन



अखिलेश ने ही दिए
थे विपिन को तमंचे
भतीजी का जन्म होने की खुशी मनाने के लिए विपिन उसी दिन (26 फरवरी) को पटाखे लेकर आया था। तभी अखिलेश ने विपिन से कहा कि वह भतीजी होने की खुशी फायर करके मनाएगा। अखिलेश अपने घर से 315 बोर के दो तमंचे और दस कारतूस के पैकेट ले आया। दोनों ने उस दिन एक-एक फायर किया था। इसके बाद अखिलेश ने विपिन के पास तमंचे और बचे हुए कारतूस यह कहकर रखवा दिए थे कि आगे जब नामकरण संस्कार की दावत होगी, तब फायर करेंगे। तमंचे किसी के हाथ न लग जाएं, इसलिए उसने बेड के नीचे छुपाकर रख दिए थे।



दोस्त के साथ बहन को कमरे
में देखा तो फूटा गुस्सा
विपिन रोजाना जिम करने जाया करता था। घटना वाले दिन वह जिम करने गया हुआ था। नौ बजे वह घर लौटा तो उसने अपने दरवाजे पर सचिन को खड़ा देखा। वह सचिन की अनदेखी करते हुए घर में घुस गया। घर में मां सुखदेवी और भाभी प्रीति अपनी बच्ची के साथ नीचे बरामदे में बैठी हुई थीं। विपिन सीधे दूसरी मंजिल पर बने अपने कमरे पर आया। विपिन के मुताबिक कमरे का दरवाजा बंद देखकर उसने दरवाजा खटखटाया, मगर प्रियंका को दरवाजा खोलने में कुछ देर लगी। दरवाजा खोलने के बाद वह नीचे चली गई। इसके बाद वह कमरे में अंदर गया तो अखिलेश को देखा। बस इससे विपिन आग बबूला हो गया और पहले अखिलेश के थप्पड़ जड़ा। इसके बाद दोनों में गुत्थमगुत्था हो गई। इसी दौरान विपिन ने अखिलेश को जमीन पर पटक दिया। विपिन का कहना है कि इस बीच अखिलेश ने अपनी कमर में लगा तमंचा निकालकर फायर करने की कोशिश की, लेकिन विपिन ने तमंचा छीनकर फेंक दिया और अखिलेश के सीने पर पैर रखकर बेड के नीचे रखे अपने दोनों तमंचे निकालकर उन्हें लोड किया और अखिलेश के ऊपर ताबड़तोड़ तीन फायर कर दिए। एक गोली अखिलेश की पीठ और दूसरी गोली उसके सिर में लगी। इसके बाद विपिन अपने कमरे से नीचे आया और बरामदे में खड़ी बहन प्रियंका पर दो फायर किए। एक गोली उसने बहन की कनपटी के पास तमंचा रखकर चलाई। यह देखकर भाभी प्रीति और मां सुखदेवी बेहोश हो गईं। इसके बाद विपिन दोनों तमंचे लेकर घर के बाहर निकला तो फायरिंग की आवाज सुनकर गली में भीड़ जमा हो गई। विपिन हाथों में तमंचा लहराते हुए प्यारेलाल के घर पर गया और वहां दो फायर किए, जिसमें प्यारेलाल का बेटा सतीश बाल-बाल बच गया। इसके बाद गली से वापस लौटते समय सचिन दिख गया। उसने सचिन पर तमंचा तान दिया। यह देख सचिन अपनी जान बचाने के लिए ड्राइंगरूम की तरफ भागा, जहां विपिन ने एक फायर सचिन के सीने में ठोंक दिया। इसके बाद विपिन मोहल्ले से फरार हो गया। प्यारेलाल के यहां विपिन उनके बेटे को तलाश करते हुए पहुंचा था, मगर वह नहीं मिला तो हवाई फायर करके चला आया था। हालांकि पुलिस ने एफआईआर के हिसाब से लिखा पढ़ी की है, मगर उसमें भी प्रियंका और अखिलेश के संबंधों का जिक्र कर दिया है।
इंस्पेक्टर सदर बाजार यतेंद्र भारद्वाज के मुताबिक जब अखिलेश और विपिन के बीच रुपये के लेनदेन को लेकर झगड़ा हो रहा था तो उसी दौरान प्रियंका वहां आ गई। उसे देखकर मुस्कराया तो पहले से उन दोनों के बीच संबंधों का शक यकीन में बदल गया। तभी उसने दोनों को मार डाला।


कारतूस खत्म हो गए, नहीं
तो अपने भी गोली मार देता
पुलिस के मुताबिक विपिन ने बताया कि उसके पास कुल आठ कारतूस थे। जिसमें से तीन फायर अखिलेश पर किए और दो फायर बहन प्रियंका पर किए थे। इसके बाद दो फायर प्यारेलाल के घर पर किए। बाकी का बचा एक करतूस सचिन पर चला दिया। घटना को अंजाम देने के बाद उसने अपने गोली मारने के मकसद से जेब टटोलकर देखी। जेब में कोई कारतूस नहीं बचा था। अगर कोई कारतूस बचा होता तो वह अपने गोली मार लेता।


घटना को अंजाम देने
के बाद गया दिल्ली
घटना को अंजाम देने बाद विपिन ने एआरटीओ ऑफिस वाली गली के पास से निकल रहे नाले में एक तमंचा और खून से सनी टी-शर्ट निकालकर फेंक दी। खाली बनियान और जींस पहने हुए एआरटीओ ऑफिस वाली गली से होते हुए रोडवेज स्टैंड पहुंचा। यहां से उसने निगोही के लिए एक टेंपो सौ रुपये में बुक किया। निगोही से उसने बरेली के लिए प्राईवेट बस पकड़ी और बरेली पहुंच गया। बरेली में ही उसने नई टी-शर्ट खरीदी और पूरा दिन वहीं इधर-उधर काटने के बाद रात को बरेली में रेलवे जंक्शन पहुंचा उसने दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़ ली। भाई संतोष के पास पहुंचकर उन्हें पूरी बात बताई। इस घटना को जानने के कारण ही संतोष यहां अपनी बहन के अंतिम संस्कार में नहीं आया था। बाद में रिश्तेदारों के पकड़े जाने की खबर मिली तो संतोष ने ही उसे वापस भेज दिया। पुलिस के मुताबिक बुधवार सुबह 10.30 बजे विपिन चिनौर में रहने वाले अपने चचेरे भाई सुशील और लल्ला के यहां जा रहा था। तभी चिनौर से पहले हाईडिल पुलिया के पास सदर पुलिस ने एक तमंचे के साथ गिरफ्तार कर लिया।


सचिन से पहले हो
चुका था विवाद
करीब डेढ़ साल पहले बहन प्रियंका के चक्कर में विपिन का सचिन से विवाद हो चुका था, जिसमें पुलिस ने मामले में समझौता कराया था। घटना वाले दिन सचिन को अपने दरवाजे पर देखकर विपिन का खून खौल गया। बहन और दोस्त को मौत के घाट उतारने के बाद सचिन के सामने पड़ने पर विपिन को पुरानी कहानी याद आ गई और उसने सचिन को भी जान से मारने के इरादे से फायर झोंक दिया था।


कोर्ट में पेश करने के बाद
विपिन को भेजा गया जेल
सदर पुलिस ने विपिन को बुधवार सुबह ही थाने से हटा दिया था। दोपहर तीन बजे कोर्ट में बयान होने के बाद पुलिस ने विपिन को जेल भेज दिया। जेल के बाहर पत्रकारों के सवाल करने पर विपिन ने यही कहा कि अगर किसी की बहन के साथ ऐसी स्थिति होती तो वह भी यही करता जो उसने किया।
विज्ञापन



अभी दो तमंचों
की रहेगी तलाश
पुलिस को अभी दो तमंचे तलाश करने होंगे। एक तो विपिन ने नाले में फेंका था और दूसरा वह जो अखिलेश से छीनकर विपिन ने फेंका था। अखिलेश वाला तमंचा 32 बोर का बताया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें