श्रीश्री ने नाम लिए बगैर राहुल और केजरीवाल पर साधा निशाना
- संत, ऋषि और मुनि का वर्गीकरण कर बताया एक-दूसरे के पूरक
- भाजपा के टिकट बंटवारे पर भी जताया असंतोष
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। मंगलवार को जिले के एक दिवसीय दौरे पर आए द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर पत्रकारों से मुखातिब होने पर अध्यात्मिक कम, राजनीतिक शख्सियत ज्यादा नजर आए। वार्ता के दौरान उन्होंने राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बगैर दोनों पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि देश को चलाने के लिए किसी बच्चे या कमजोर व्यक्ति की जरूरत नहीं है, बल्कि एक मजबूत व्यक्ति चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मोदी का नाम लिए बगैर ही उनका समर्थन भी कर दिया।
देश की जनता किसे वोट करे? इस सवाल के जवाब में श्री श्री ने कहा कि वह किसका समर्थन करेंगे यह किसी को नहीं बताएंगे। क्योंकि उनके साधक गुरु आज्ञा मानकर उसी पार्टी को वोट देंगे। बताया कि वह किसी से उसके वोट देने की स्वतंत्रता नहीं छीनना चाहते। बस केवल शत-प्रतिशत मतदान करने की अपील करते हैं। इसके साथ ही साधकों को प्रत्याशी चयन में खास सतर्कता बरतने की भी सलाह दी है। बोले कि केंद्र का प्रत्याशी चयन करने के लिए सोच का दायरा बढ़ाने की जरूरत है।
भाजपा के टिकट बटवारे पर रविशंकर ने कहा कि इसमे कुछ भूलें र्हुइं हैं और इसका परिणाम पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। वार्ता के दौरान वह आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के बारे में बोले कि अरविंद अच्छे व्यक्ति हैं। उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है, लेकिन अब वह रास्ता भटक गए हैं। केजरीवाल को अध्यात्म की जरूरत है। इसके अलावा वह किसी भी दल के नेता का नाम लेने से परहेज करते नजर आए, लेकिन मजबूत व्यक्ति की बात कहकर इशारों में नरेंद्र मोदी का समर्थन भी किया। उन्होंने हर ओर भ्रष्ट प्रत्याशी होने पर न्यूनतम भ्रष्ट के पक्ष मतदान करना लोगों की व्यवस्था बताई।
इससे पहले उन्होंने संत, ऋषि और मुनि का वर्गीकरण करते हुए कहा कि संत हृदय से होता है। हर व्यक्ति के अंदर एक संत है, बसे उसे जगाने की जरूरत है। ऋषि वह जो मंत्रों का अनुष्ठान करे। मुनि संसार के लिए कुछ अच्छा करने की इच्छा रखने वाला होता है। यह तीनों एक ही हैं। अच्छे व्यक्ति में तीनों ही गुणों के होने की जरूरत है।
परमात्मा के बारे में विचार व्यक्त करते हुए श्री श्री ने कहा कि परमात्मा का स्वरूप मन के स्वरूप जैसा है, जो निर्गुण और निराकार है, लेकिन वह अपने सगुण और साकार संसार में अपने होने का एहसास कराता है। मरने के बाद आत्मा कहां जाती है इस बारे में बोले कि मृत्यू के बाद आत्मा शरीर से अलग होती है, लेकिन रहती यहीं पर है। जैसे टेलीविजन बंद होने पर उसकी तरंगें गायब नहीं होती, वहीं पर रहती हैं।