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निकाह करेंगे चेयरमैन साहब

Mon, 17 Mar 2014 05:33 AM IST
Shahjahanpur
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होली संवाददाता
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शाहजहांपुर। शहर के प्रथम नागरिक यानी अपने चेयरमैन साहब जल्द ही निकाह रचाने जा रहे हैं। इरादा तो था कि होली से पहले ही वह दूल्हा बन जाए, मगर चुनाव रोड़ा बन गया। उन्होंने कहना शुरू कर दिया है कि अभी तो चुनाव निपटवा रहा हूं, मगर इसके बाद निकाह करूंगा और कई दिन के लिए गोवा जाऊंगा। ऐसे में लोग परेशान हैं कि अभी आचार संहिता के कारण नए कामों को स्वीकृति नहीं मिल पा रही है, फिर वह महीना भर के लिए बाहर चले जाएंगे।
तनवीर खां दो दिसंबर वर्ष 2000 को जब नगर पालिका परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर पहली बार काबिज हुए थे, तभी से उनके मन में शादी करने का उल्लास जोर मार रहा था, लेकिन जनता की सेवा और सड़कों के शुभारंभ और शिलान्यास के चलते समय ही नहीं निकाल पाए। फिर जब दूसरी बार 18 नवंबर 2006 में चेयरमैन बने, तब सोचा कि इस बार तो शादी करके ही मानूंगा, लेकिन विधायक बनने की चाह में इस बार भी उनका शादी करने का सपना पूरा नहीं हो सका। मगर जब 18 जुलाई, 2012 को तनवीर खां ने तीसरी बार पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की शपथ ली तो उन्होंने जल्द ही निकाह रचाने की ठानी। मगर बात फिर टलती गई। उनके छोटे भाई का निकाह हो चुका है। लोगों ने यह बात बताकर उन्हें याद दिलाया लोकसभा चुनाव आ गया। सो उन्होंने बीच में सगाई की रस्म कर डाली। हमारे फर्जी सूत्रों की माने तो वे चुनाव बाद निकाह कुबूल करने वाले हैं। बताते हैं कि यह बात वह लखनऊ में नेताजी को भी बता आए हैं। तनवीर भाई को कुर्सी पर बैठे हुए 14वां साल चल रहा है, मगर घरेलू जिम्मेदारियों से यह वनवास अब खत्म होने ही वाला है।
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दिलरुबा की याद में कुटिया उदास
शाहजहांपुर। निगोड़ा होली त्योहार है ही ऐसा, जिसमें भूले-बिसरे मीत याद आने लगते हैं। भले ही बारहो मास गुलाबी रहने वाला मौसम अब स्याह चल रहा हो, लेकिन दशकों पुरानी प्रीत मन में हिलोरें मारने ही लगती है। ‘उम्र भर में दो ही घड़ियां मुझपे बीती हैं कठिन, एक तेरे आने से पहले एक तेरे जाने के बाद’ ऐसी पंक्तियां अक्सर दिलरुबा की याद ताजा करने लगती हैं। यादें बाबाजी को अंदर ही अंदर चट किए जा रही हैं। गुलाल से भी अधिक गुलाबी गाल देखने को आंखें तो तरस ही गईं, साथ ही मिसरी से भी अधिक मिठास वाली ‘कूक’ याद करके कानों ने भी खड़ा होना बंद कर दिया है। पूरे लच्छन झरने के बाद भी वह गाते घूम रहे हैं ...दिल है कि मानता नहीं’।
होली का मौका देख बैठे-ठाले मन में आया कि चलो ‘कुटिया’ का चक्कर लगाया जाए और देखा जाए कि प्रात: स्मरणीय बाबा होली की तैयारियां किस गियर में कर रहे हैं। ‘कुटिया’ में झांका तो देखा धूनी रमाए हुए हैं। आंखें सुर्ख हैं। हम उम्र उन मित्रों को याद कर रहे हैं जो आज भी गुलाबजल से स्नान कर रहे हैं। फिर बाबा उठकर लुक्का भाई की ‘कुटिया’ तलक पहुंच गए। वहां पहले से ही तमाम भाई बहनजी को रंगों से सराबोर करने में जुटे थे। बाबाजी दूसरे दाढ़ी वाले प्राचीन कुंवारे मित्र के ठिकाने पर पहुंचे तो गम में मित्र ने जैसे उन्हें देखा ही नहीं। बचते-बचाते प्रात: स्मरणीय उनकी ‘मड़ैया’ तक ही पहुंचे होंगे कि उनकी नजर मित्र पर पड़ गई, जो पहले से ही किसी कि याद में टिसुए बहा रहे थे। आखिरकार होली खेलने का विचार से संन्यास लेकर ‘ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं’ गीत गाते हुए वह उस दाढ़ी वाले की शरण में जाने की तैयारी में जुट गए, जो इस बार पूरे देश में चाय वाली होली का हुड़दंग मचाए हुए हैं।


तब नाचे थे और अब नपे हाकिम
होली संवाददाता
शाहजहांपुर। दूसरों को उंगलियाें पर नचाने में माहिर बड़े यदुवंशी यानी अपने कलक्टर साहब को पिछली होली के चक्कर में इस होली से पहले ही हटा दिए गए। अपने आवास पर ठुमके लगाना भारी पड़ गया। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उन्हें वेटिंग में डाल दिया गया है। पिछले वर्ष होली पर लाट साहब का जुलूस शांतिपूर्वक निकल जाने के बाद अपने आवास पर होली खेलने की योजना बनाई थी। ढोल-बाजे बुलवाए गए और ड्रमों में रंग घुलवाने का फरमान अधीनस्थों को दे दिया गया था। इसके बाद जो कुछ हुआ, वह अप्रत्याशित था। कड़क कार्यशैली से अधीनस्थों में डर बैठाने वाले या यूं कहें कि अपनी उंगलियाें पर अधिकारियों और कर्मचारियों को नचाने वाले डीएम ने रंगों से सराबोर होकर ढोल बाजे पर जो ठुमके लगाए, उसे देखकर हर कोई दंग रह गया। डीएम साहब होली के हुड़दंग में खूब मस्त हो गए थे। मीडिया वालों के कैमरे भी उन्हें टारगेट पर रखे हुए थे। डीजे पर बज रहे शीला की जवानी वाले गीत पर तो उन्होंने कमर पर हाथ रखकर जो डांस किया, वह और भी चौंकाने वाला था। अगले दिन डीएम के फोटो सहित उनकी खबर अखबारों में सुर्खियों में प्रकाशित हुई तो उन्हें समझ में आया कि वास्तव में कुछ ज्यादा हो गया। इस बार चूंकि लोकसभा चुनाव भी चल रहे हैं और उससे पहले होली आ गई। इसलिए चुनाव आयोग ने सावधानी बरतते हुए उन्हें हटाना ही जरूरी समझा और शासन को फरमान जारी कर तत्काल प्रभाव से उनका स्थानांतरण करने के आदेश जारी कर दिए। फिलहाल, उन्हें वेटिंग में रखा गया है।



जिला पंचायत अध्यक्ष की छिनी कुर्सी
होली संवाददाता
शाहजहांपुर। पूरी तरह गरमाए हुए चुनावी माहौल में समाजवादी पार्टी को करारा झटका लगा है। विरोधियों की शिकायत पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह को पद से हटने का फरमान जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री के इस बड़े निर्णय से पार्टीजनों में रोष है। जानकारी मिली है कि नीतू सिंह के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद उनके विरोधियों ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया था। उनके हर क्रियाकलाप पर नजर रखी जाने लगी। विरोधियों ने उन कार्यक्रमों की क्लिपिंग बनाना शुरू कर दी थी, जिनमें नीतू सिंह पति उपेंद्र पाल सिंह के साथ कार्यक्रमों में शिरकत करने जाती थीं। ऐसे ही तमाम सबूतों को इकट्ठा कर विरोधियों ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। पता तो यह भी चला है कि उपेंद्र पाल सिंह लोकसभा चुनाव के पार्टी प्रत्याशी को कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं। इस कारण भी मुख्यमंत्री उनसे खफा चल रहे थे। चुनाव में सीट संकट में न पड़ जाए तथा विरोधियों को और मौका न मिले, इसलिए शासन ने नीतू सिंह को हटाना ही मुनासिब समझा। रविवार शाम मुख्यमंत्री ने नीतू सिंह को फोन करके उन्हें सीट छोड़ने को कह दिया। अचानक हुए इस आदेश से पार्टी में विशेष रूप से नीतू सिंह के समर्थकों में खासा रोष व्याप्त है और वे मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ रवाना हो गए। इस पूरे प्रकरण में सांसद मिथलेश कुमार का हाथ बताया जा रहा है, जो इस बार भी पार्टी प्रत्याशी हैं। अंदरखाने बात चल रही है कि सांसद काफी दिनों से उपेंद्र पाल से बदला लेने की जुगत में थे।


मिथलेश के टिकट पर संकट
जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह की कुर्सी छिनने के बाद उनके समर्थकों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से फरियाद की। उन्हें प्रत्याशी मिथलेश कुमार के अब तक पार्टी विरोधी रहे कृत्यों के बारे में बताया गया। मुख्यमंत्री ने अपने चचा आजम खां से गहन मंत्रणा करने के बाद सांसद के इस रवैये को चुनाव के लिए अच्छा नहीं माना और उन्हें पार्टी से चुनाव लड़वाने पर पुनर्विचार करने की बात तय की। यहां बता दें कि मिथलेश कुमार बहुत पहले ही सपा से टिकट पा चुके थे और चुनाव अभियान में जुटे थे, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह के पति उपेंद्र पाल सिंह की शिकायतें कराकर सांसद मिथलेश ने अपने लिए कांटे बो लिए हैं। मिथलेश का टिकट कटने का पूरा भरोसा मिलने के बाद एक तबका काफी खुश नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि मिथलेश की शिकायत ऊपर तक पहुंचवाने में विधायक राजेश यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


चिन्मयानंद ने छोड़ दी भाजपा सपा में जाएंगे
होली संवाददाता
शाहजहांपुर। लोकसभा चुनाव में हरिद्वार तो क्या अन्य किसी स्थान से भी भाजपा से टिकट नहीं मिल पाने से खिन्न पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने पार्टी छोड़ दी है। इसके बाद उन्होंने मुलायम सिंह यादव के आग्रह पर सपा का दामन थाम लिया है। मुलायम सिंह ने उन्हें हरिद्वार से ही चुनाव लड़वाने का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि स्वामी चिन्मयानंद ने विगत माह मुमुक्षु आश्रम में ही मीडिया से मुखातिब होते हुए हरिद्वार अथवा पार्टी के निर्देश पर कहीं से भी भाजपा से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी की जमकर वकालत भी की और कहा कि उनकी प्राथमिकता हरिद्वार से चुनाव लड़ने की है, लेकिन यदि पार्टी कहीं और से भी लड़ाएगी तो वह मना नहीं करेंगे। इस बीच15 मार्च को भाजपा की प्रत्याशियों की सूची में चिन्मयानंद का नाम नहीं है।
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चिन्मयानंद ने पार्टी के प्रति खासी नाराजगी जताते हुए होली संवाददाता से कहा कि अब वह भाजपा के कार्यकर्ता नहीं हैं। नेताजी ने उन्हें हरिद्वार से टिकट देने का भरोसा दिया है। समाजवादी पार्टी में सदस्यता ग्रहण करने तथा हरिद्वार से टिकट मिलते ही वह नामांकन प्रक्रिया तेज कर देंगे और चुनाव प्रचार में जुट जाएंगे।
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