किसानों में हर तरीके का विश्वास जमाना होगा
- पहले कुप्रबंधन के कारण ही बंद हुई थी चीनी मिल
आशुतोष शुक्ला
पुवायां। मुख्यमंत्री के आदेश पर मरम्मत के बाद उनके ही हाथों पेराई सत्र का शुभारंभ होने के बाद मिल अधिकारियों के सामने मिल का पेराई सत्र सुचारू रूप से पूरा कराना साख का सवाल बन गया है।
किसान सहकारी चीनी मिल शुरू तो हो गई है, लेकिन समस्याओं का अंबार कम नहीं हुआ है। सबसे बड़ा सवाल किसानों के बीच साख बनाने का है। कई वर्ष तक बंद रहने के बाद शुरू होने जा रही चीनी मिल चलेगी कि नहीं चलेगी इसको लेकर किसान अभी उहापोह में है। कई किसान तो पुवायां चीनी मिल को मिले क्रय केंद्र निजी मिलों को दिए जाने की मांग को लेकर गन्ना आयुक्त तक से मिल चुके हैं। मिल की पेराई क्षमता 18 से 20 हजार क्विंटल रोजाना की है। मिल को सात केंद्र और मिल गेट आवंटित किया गया है। ऐसे में पेराई लायक गन्ना रोजाना जुटाना खासकर रात के समय चुनौती से कम नहीं होगा। गन्ना कम मिलने पर नो केन की स्थित में मिल बंद होने से घाटा हो सकता है।
इसके अलावा चार वर्ष से ठप पड़ी मशीनरी ठीक से चलती रहे यह भी बड़ा सवाल है। मिल की मशीनों का ट्रायल किया जा चुका है। बिना गन्ना डाले खाली चल रही मशीने ठीक काम कर रही हैं, लेकिन असली परीक्षा पेराई के समय ही होगी। एक और बड़ा काम मिल के सही प्रबंधन का है। वर्ष 1985 से चली चीनी मिल कुप्रबंधन के कारण ही भारी घाटे में चली गई थी और चार वर्ष पूर्व इसे बंद कर देने का निर्णय लेना पड़ा था। तब मिल चलने के समय चर्चा थी कि गन्ने का जूस ज्यादा हो जाने पर उसे भैंसी नदी में बहा दिया जाता था। नए प्रबंधन को इस ओर दृष्टि रखनी पड़ेगी। तैयार चीनी, शीरा, बैगास आदि की बिक्री, किसानों का समय से भुगतान आदि भी चुनौतीपूर्ण कार्य होंगे।
मिल में पेराई शुरू होने पर असली परीक्षा शुरू होगी। हर काम में बाधा तो आती ही है, लेकिन मैं सभी कर्मचारियों और मिल की मरम्मत का काम देख रही कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों के सहयोग से मिल को चलाने में जरूर सफल हो जाऊंगा, यह मेरा विश्वास है।
-एएस पोरस, जीएम, चीनी मिल पुवायां