किसान महोत्सव के उद्घाटन समारोह में बोले राज्यमंत्री राममूर्ति
- डीएम के साथ विभिन्न विभागों के स्टालों का किया निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। कृषि विभाग का सालाना आयोजन किसान महोत्सव शुक्रवार को गन्ना शोध परिषद के परिसर में धूमधाम से आरंभ हो गया। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा ने डीएम राजमणि यादव के साथ फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर तीन दिवसीय महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया और किसानों से आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक पद्घति से खेती करके कृषि उत्पादन बढ़ाएं।
नियत समय से करीब दो घंटा देर से पहुंचे राज्यमंत्री ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि प्रधान देश में किसानों को खेती संबंधी अत्याधुनिक जानकारियां होनी जरूरी हैं। इस क्षेत्र में दक्षिणी राज्यों के किसान कहीं अधिक जागरूक हैं, जबकि कृषि उत्पादन उत्तर भारत में अधिक होता है। कृषि वैज्ञानिकों ने बड़ी मेहनत से कृषि उत्पादन में देश को आत्म निर्भर बनाया। किसानों को चाहिए कि वे नियमित रूप से मृदा परीक्षण कराएं और फसलें लेने की नवीनतम तकनीक अपनाकर आर्थिक रूप से खुद को और देश को मजबूत करें।
राज्यमंत्री ने मृदा परीक्षण विभाग के अधिकारियों को अभियान चलाकर खेतों से मिट्टी के नमूने संकलित कर उनकी सही जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि केवल पारंपरिक खेती से आज के दौर में किसानों का भला नहीं होने वाला। पशु पालन, उद्यानीकरण, वनीकरण, मत्स्य पालन जैसे उद्यम अपनाकर किसान परिवार बेहतर तरीके से खेती के लाभ पा सकेंगे। कृषि वैज्ञानिक किसानों को खेती की नवीनतम तकनीकें बताकर महोत्सव को सार्थक बनाएं।
जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह ने कहा कि किसानों को बताया जाना चाहिए कि उपचारित बीज की बुवाई के कितने लाभ मिलते हैं और किस फसल में कितनी खाद डाले जाने की जरूरत है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. एलबी सिंह ने कहा कि किसान कृषि संबंधी किसी भी समस्या का निदान पाने के लिए किसी भी समय केंद्र पर आकर संबंधित वैज्ञानिक से उचित परामर्श हासिल कर सकते हैं। विनोबा सेवा आश्रम के संस्थापक रमेश भइया ने खेती में लैंगिक समता लाने केलिए महिला किसानों को बढ़ावा देने पर बल दिया।
आर्य महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अर्थशास्त्र प्रवक्ता डॉ. रुचि द्विवेदी के संचालन में हुए समारोह केप्रारंभ में गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बख्शी राम ने अतिथियों का स्वागत किया। कृषि उप निदेशक डॉ. राधा कृष्ण यादव ने स्वागत भाषण में महोत्सव के उद्देश्य स्पष्ट करके कृषक-वैज्ञानिक संवाद कराने का उल्लेख किया। कार्यक्रम में सीडीओ डॉ. रमाशंकर मौर्य, एसडीएम सदर जयनाथ यादव, जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय, डॉ. एनपी गुप्ता, राजेश भटनागर आदि अनेक विभागों के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता कर रहे फकीरे लाल ने सभी का आभार जताया।
इन सभी ने लगाए स्टाल
किसान महोत्सव में कृषि, कृषि रक्षा, भूमि संरक्षण, भूमि विकास एवं जल संसाधन, गन्ना शोध परिषद, कृषि विज्ञान केंद्र, पंचायती राज, नेडा, दुग्ध विकास, वन, उद्यान, फल संरक्षण, सिंचाई, मृदा परीक्षण, रेशम, मत्स्य, गन्ना, पशुधन, मंडी, स्वास्थ्य, सरस्वती एजूकेशनल वेलफेयर सोसायटी, राष्ट्रीय युवा विकास शोध संस्थान, भावना सेवा संस्थान, विनोबा सेवा आश्रम, सरस्वती ग्लोबल वेलफेयर एजूकेशनल सोसायटी आदि विभागों और स्वयंसेवी संगठनों समेत विभिन्न कंपनियों ने करीब 45 स्टाल लगाए। कई स्टालों पर उपलब्ध कंपनी उत्पादों की बिक्री भी हुई।
आकर्षण का केंद्र
बनी रेन गन
बारिश कम होने या फिर मानसून लेट होने पर फसलों पर पारंपरिक सिंचाई के बजाय बौछारी पद्घति ज्यादा कारगर मानी जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस विधि को अपनाने में पानी की कम खपत होती है और वह सीधे पौधों की जड़ तक पहुंचता है। अभी तक बौछारी सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर इस्तेमाल होते रहे, लेकिन अब उससे उन्नत श्रेणी का यंत्र रेन गन मार्केट में आ गया है। करीब 25 से 30 मीटर दायरे में सिंचाई के बाद बंदूक के आकार का यह यंत्र पाइप से जुड़ा होने केकारण दूसरी जगह शिफ्ट हो सकता है। महोत्सव में उद्यान विभाग के स्टाल पर प्रदर्शित की गई रेन गन तमाम किसानों के आकर्षण का केंद्र बन गई। जिला उद्यान अधिकारी रामनरेश वर्मा के अनुसार बाजार में रेन गन की कीमत 34 हजार रुपये से अधिक है, लेकिन विभागीय स्तर से इसकी खरीद करने पर छोटे किसानों को 90 प्रतिशत और बड़े किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान देय है।