हड़ताली नेताओं के फूल भेंट करने पर दिया नैतिक समर्थन
- सातवें दिन भी कायम रहा डिप्लोमा इंजीनियर्स का दबदबा
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद एवं राज्य कर्मचारी महासंघ के साझा संगठन राज्य कर्मचारी अधिकार मंच की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर शुरू की गई बेमियादी हड़ताल के सातवें दिन भी डिप्लोमा इंजीनियर्स घटक संगठन का दबदबा कायम रहा। हालांकि, हड़ताल में कलक्ट्रेट और विकास भवन के कर्मचारियों को शामिल कराने को मंच केपदाधिकारियों ने मंगलवार को गांधीवादी तरीका अपनाया और इसके सार्थक नतीजे भी मिले।
हड़ताली कर्मचारी नेताओं का दावा है कि बेमियादी संघर्ष में विभिन्न विभागों के 40 से अधिक घटक संगठन शामिल हैं, लेकिन हकीकत में कुछेक संगठन ही हड़ताल को अपने कंधों पर ढो रहे हैं। शुरुआती तीन-चार दिन तक स्वास्थ्य विभाग, लेखपाल संघ, राजस्व संग्रह अमीन संघ, मातृ एवं शिशु कल्याण कर्मचारी संघ, प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ संघ आदि संगठनों ने सहयोग बरकरार रखा। अब डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने हड़ताल की कमान संभाल रखी है क्योंकि मंच के अध्यक्ष अनिल दीक्षित इसी घटक संगठन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
धरना स्थल पर सभा से पूर्व मंच के जिलाध्यक्ष श्री दीक्षित ने मंत्री दिनेश चंद्र सक्सेना व अन्य पदाधिकारियों के साथ कलक्ट्रेट और विकास भवन केविभिन्न कार्यालयों में जाकर वहां के स्टाफ को पुष्प भेंट करके हड़ताल में सहयोग मांगा। इस पर मिनिस्ट्रीयल कलक्ट्रेट संघ के अध्यक्ष अवधेश अग्निहोत्री, विकास भवन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पवन मिश्रा, उपाध्यक्ष भगवान शरण सांख्यधर आदि ने धरनास्थल पर जाकर समर्थन दिया।
कर्मचारी नेताओं ने आश्वस्त किया कि प्रांतीय नेतृत्व से दिशा-निर्देश मिलते ही उनके संगठन हड़ताल में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। सभा में कर्मचारी नेताओं ने सरकार से भीषण संघर्ष को तैयार रहने की प्रतिबद्घता दोहराते हुए कहा कि सरकारी धमकियां आंदोलन से विचलित नहीं कर पाएंगी। धरना-प्रदर्शन में रामऔतार शर्मा, महारम सिंह, मनोज कुमार सक्सेना, दिनेश सिंह, विवेक चतुर्वेदी, रजविंदर कौर, अंशू वाजपेयी, पिंकी तोमर, सोमपाल सिंह, जितेंद्र सिंह आदि कर्मचारी नेताओं ने हड़ताली स्टाफ में जोश भरा।
आज से नहीं बनेंगे
ओपीडी के पर्चे
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे मंच के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने धरना स्थल पर सभा में सरकार को ललकारते हुए कहा कि एक सप्ताह से जारी हड़ताल का संज्ञान नहीं लिए जाने के विरोध में मंगलवार से जिला अस्पताल का वाह्य रोगी विभाग बंद करके वहां पर्चे बनाने पर रोक लगा दी जाएगी। इसके साथ ही जेएसवाई योजना के चेक जारी करने पर रोक लगा दी जाएगी। इस पर भी सरकार नहीं चेती तो 20 नवंबर से स्टाफ नर्स केवल एक शिफ्ट में काम करना शुरू करेंगी और 21 नवंबर से ब्लड बैंक सहित अस्पताल की सभी सेवाएं रोक दी जाएंगी।