श्रीराम-भरत मिलन को देख दर्शक भाव विभोर
अमर उजाला नेटवर्क
सिंधौली। कस्बे में चल रही श्रीरामलीला में वृंदावन के कलाकारों ने राम-केवट संवाद, भरत-कैकेई संवाद, चित्रकूट में राम-भरत मिलाप आदि लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया।
रामलीला में प्रभु राम निषाद राज के साथ गंगा तट पर पहुंच कर केवट से गंगा पार कराने के लिए कहते हैं। तब केवट कहता है कि प्रभु जब आपके चरण स्पर्श मात्र से एक शिला नारी बन सकती है तो मेरी यह काठ की नाव क्या बन जायेगी। हे प्रभु यह नाव ही मेरी रोजी रोटी का सहारा है। राम के समझाने पर केवट पांव पखारने की शर्त पर तट पार कराने को तैयार हो जाता है। उतराई में प्रभु राम जब केवट को मुद्रिका देते हैं तो केवट उतराई लेने से मना कर देता है।
मंत्री सुंमत भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से वापस अयोध्या लाते हैं। भरत कैकेई को श्वेत वस्त्रों में देखकर पूछते हैं कि मां सब कुशल तो हैै, तब कैकेई दशरथ मरण की जानकारी भरत को देती हैं। तब भरत-शत्रुघन विलाप करते हैं। भरत भाई राम के बारे में पूछते हैं, तब कैकेई बताती है कि मैंने तुम्हारे लिए राजगद्दी और राम को 14 वर्ष का वनवास तुम्हारे पिता से मांग लिया। राम वन को चले गए हैं। भरत राम से मिलने के लिए वन को चल देते हैं। भरत को सेना सहित देखकर लक्ष्मण आवेश में आकर भाई राम से उनके साथ युद्ध करने के लिए मना नहीं करने प्रार्थना करते हैं। राम लक्ष्मण को समझाकर कहते हैं कि मेरा भाई भरत ऐसा नहीं हो सकता। भरत आकर श्रीराम के चरणों में गिर जाते हैं। यह देख लक्ष्मण भाई भरत से अपने कटु वचनों की क्षमा मांगते हैं। भरत और राम के मिलाप का भाव पूर्ण मंचन देखकर दर्शक भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पाये।
मेला की व्यवस्था में रामाधार सिंह, रमेश दीक्षित, सुरेन्द्रपाल, मनोज मिश्रा, वासुदेव मिश्रा, दिनेश गुप्ता, शिवसरन पांडेय, वीरपाल यादव आदि का सहयोग रहा।