शाहजहांपुर। शुक्रवार को मोहर्रम की आठवीं तारीख थीं। अकीदतमंदों ने ताजिए सजाए और घर में रखे। इमाम हसन-हुसैन को याद कर दुआएं मांगी गईं। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
शाही इमाम बाड़ा चौक में हुसैनी मिशन की ओर से आयोजित मजलिस में मौलाना डा.हैदर मेहंदी ने कहा कि मोहम्मद साहब और उनके अहलेबैत की वजह से इस्लाम की रौनक कायम है। सभी मुसलमानों को पैगम्बर मोहम्मद साहब की बेटी फातिमा, दामदा अली मुर्तुजा और नवासे हसन-हुसैन के कुनबे की कुर्बानी को याद करना चाहिए। उनके पूरे कुनबे ने कुर्बान होकर इस्लाम को जिंदा किया। यह मुसलमानों पर एक बड़ा एहसान है उनका। अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास के दिलसोज मसायब पढ़े। जिससे यहां मौजूद अकीदतमंदों की आंखों में आंसू झलक आए। उधर, रोशनी कलर्च ग्रुप की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हजरत इमाम हसन और हुसैन को याद किया गया। पैगी नईम, मोहम्मद शान, मोहम्मद वसी, अनीस, आमिर, इरफान, मोहम्मद चांद, नौशाद, शफी अहमद, रजी, सैफ, हामिद, मोहम्मद इमरान, दिलशान, मोहम्मद आरिफ, शब्बू, सलमान, मुन्ने शाह आदि कार्यक्रम पेश किया। सभी हरे रंग के कपड़े पहने थे। इधर, कुछ लोग ताजिए अपने घर पर ले जाते नजर आए। ताजिए काफी सजाए गए थे।