सोने-चांदी और फैंसी आभूषणों तथा चांदी के सिक्कों की बिखरी चमक
- कंडील से कारों तक की जमकर हुई बिक्री
- बर्तन बाजार सर्वाधिक रहा गुलजार
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। महंगाई तो क्या त्योहार मनाना छोड़ दें। महंगाई तो हर चीज पर है, तो क्या खाना छोड़ दिया जाए, बच्चों की पढ़ाई बंद कर दें, स्कूटर-मोटर साइकिल पर चलना बंद कर दें। क्या-क्या छोड़ें। जब कुछ भी नहीं छोड़ सकते तो तीज-त्योहार की खरीददारी कैसे बंद हो सकती है। कुछ इसी तरह के विचार लेकर रविवार को लोगबाग धनतेरस की खरीददारी को घर से निकल पड़े। सुबह से आधी रात के बाद तक बाजार में रही रौनक ने इस बात की पुष्टि भी की। छोटी-बड़ी सभी दुकानों और सभी प्रकार की दुकानों पर ग्राहक उमड़े रहे। कंडील से लेकर कारों तक की बिक्री जमकर हुई। सोने-चांदी के आभूषणों, सिक्कों, फैंसी ज्वैलरी, बर्तन, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, बिजली की झालरों आदि की तो बिक्री जमकर हुई। इस दौरान पुलिस बल भी मुस्तैद रहा।
अमर उजाला ने सुबह आठ बजे से ही धनतेरस बाजार की लाइव कवरेज की। समय के साथ घटती-बढ़ती बिक्री के बीच करोड़ों का कारोबार त्योहार पर हुआ। इस तरह महंगाई पर त्योहारी खरीद बहुत भारी पड़ी।
-सुबह 08:00 बजे: आठ बजे तक सर्राफा बाजार छोड़कर बर्तन आदि की दुकानें सजसंवर कर तैयार हो रहीं थीं। हालांकि इस समय तक ग्राहकों का कहीं अता-पता नहीं था, लेकिन बाजार की सजावट त्योहार का अहसास साफ करा रही थी।
- 10:00 बजे: इस समय तक शत प्रतिशत दुकानें खुल चुकी थीं। दुकानदार पूजा-पाठ करके गद्दी संभाल चुके थे। फुटपाथ पर भी खील-खिलौने, दीया-कुचरिया, गणेश-लक्ष्मी आदि की दुकानें सज चुकी थीं। कहीं भी कैसी भी दुकान लगाने की खुली छूट थी।
- 12:00 बजे: दुपहर होते-होते बाजार में ग्राहकों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि होने लगी थी। सर्राफा बाजार से लेकर कार, मोबाइक शोरूम, इलेक्ट्रानिक शोरूम, बर्तन, मोबाइल और लैपटॉप शॉप खचाखच भर चुकी थीं। इस समय शहर के लोग कम और देहात क्षेत्रों के ग्राहक अधिक थे।
- 02:00 बजे: अपरान्ह दो बजते ही बाजार पूरी तरह से गुलजार होने शुरू हो गए थे। लगभग सभी छोटी-बड़ी दुकानें फुल हो चुकी थीं। दुकानदारों को पानी पीने तक की फुर्सत नहीं थी। बर्तनों और सोने-चांदी के आभूषणों की खरीददारी को लोग उमड़ रहे थे। इसके बाद बाजार से निकलना आसान काम नहीं था।
- 4:00 बजे: शाम के समय से मानों ग्राहकों का रेला ही उमड़ पड़ा हो। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी। शहर की सभी सड़कें जाम की स्थिति में थीं। सदर बाजार के लोगों को चौक क्षेत्र और चौक के लोगों को सदर बाजार आने में घंटों लग रहे थे।
- 6:00 बजे: शाम छह बजते ही बाजार रंग-बिरंगी और दूधिया रोशनी से जगमगा उठे थे। फूलों से सजी दुकानें देख बाजार देखने और खरीददारी करने निकले महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों को त्योहार का मजा आने लगा था। वहीं दुकानें ग्राहकों से पट चुकी थीं।
- 8:00 बजे: धनतेरस पर खरीददारी के असली आनंद का यह अच्छा समय कहा जा सकता था। इस समय तक चाट-पकौड़ी, चाउमीन, टिक्की-बताशे, डोसा, पेस्टी, पेट्रीज, आइसक्रीम आदि की बिक्री भी धुआंधार ढंग से शुरू हो चुकी थी। चटखारे लगाते ग्राहकों को धनतेरस का खूब आनंद आ रहा था। वहीं तमाम प्रकार की खरीददारी भी चरम पर थी।
- 10:00 बजे: रात तक बाजार में पैर रखने तक की जगह नहीं रह गई थी। रेंगते चल रहे लोग आगे बढ़ रहे थे। जगमगाती दुकानें देखते ही बनती थी। चिल्ल-पों के कारण कुछ भी सुनाई नहीं पड़ रहा था। दुकानदार अपने स्टाफ के साथ काफी व्यस्त थे। किसी को किसी से कोई मतलब नहीं था। हालत यह थी कि दुकानदारों को दुआ-सलाम करने की भी फुरसत नहीं थी।
- 12:00 बजे: आधी रात के बाद तक बाजारों की रौनक में कोई अंतर मालूम नहीं पड़ रहा था। अच्छी-खासी भीड़ बाजार में मौजूद थी। यह अलग बात थी कि इस भीड़ में खरीददार कम और रोशनी देखने वालों की भीड़ अधिक थी। दुकानदार भी थककर चूर हो चुके थे। उनके चेहरे पर थकान साफ झलक रही थी, लेकिन बिक्री के कारण वह खुश भी बहुत थे।