जिले में चल रही हैं अवैध शस्त्र बनाने की फैक्ट्रियां
- सिर्फ अभियान के तहत ही तलाशा जाता है असलहे बनाने वालों का सिजरा
मोहम्मद सिद्दीक
शाहजहांपुर। सुनकर थोड़ा अटपटा लगेगा जरूर कि जिले में 15 सौ रुपये में तमंचा और दो हजार रुपये में बंदूक मिल जाती है, लेकिन बात है सौ फीसदी सच। इसका खुलासा बीते गुरुवार को उस समय हुआ जब सिंधौली पुलिस ने अवैध असलहे बनाने की फैक्ट्री पकड़ी और तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस को पूछताछ में उन्होंने बताया कि वह असलहे तैयार करते हैं और उनकी बिक्री इन्हीं दामों में की जाती है।
किसी जमाने में कटरी का इलाका कहे जाने वाले जलालाबाद सर्किल में बंजर जमीन पर फसल की बजाए नाजायज असलहे बनाए जाते थे। बदमाशों के गिरोह का सफाया हो जाने के बाद अब कुछ लोग अपनी हिफाजत तो कुछ स्टेटस के तौर पर तमंचा और बंदूक रखना अपना शौक समझते हैं, इसलिए अब उद्योग के रूप में तो नहीं, बल्कि लाइसेंस पाने में असमर्थ रहने वाले लोगों की जरूरत को पूरा करने को असलहों का कारोबार चलता है। पंद्रह सौ रुपये में तमंचा और दो हजार रुपये में बंदूक तो ढाई हजार रुपये में देशी रायफल मिल जाती है। आसानी से क्षेत्र में असलहे मिल जाने पर लोग भी इन्हें शौक से खरीदते हैं, बाकायदा आर्डर देकर असलहे बनवाए जाते हैं। बड़े अफसरों के आदेश पर चलाए जाने वाले अभियान के तहत ही स्थानीय पुलिस असलहे बनाने वालों का सिजरा तलाशती है, इसके बाद भूल जाती है।
इन जगहों पर बनाए जाते हैं यह हथियार
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- जलालाबाद के गांव खंडहर, संडा, नगरा।
- पुवायां के गांव कंधरपुर, सिंधौली के पसियापुर, मूड़ा फत्तेपुर, तेरा, चंदपई, कटिया बुजुर्ग में।
- तिलहर के गांव खिरिया माल, गोपालपुर, चाहरपुर, मोहनापुर, मंसूरपुर गौटिया में।
- सदर के गांव मऊखालसा में। यहां तैनात रहे इंस्पेक्टर सदर बाजार ने दो माह पहले यहां चल रही एक फैक्ट्री पकड़ी थी।
खेतों में छिपा देते हैं बनाकर असलहे
असलहे बनाने वाले लोग पाइप आदि सामग्री बाजार से खरीदते हैं। असलहे बनाने के बाद यह लोग खेत में छिपा देते हैं और ग्राहक आने पर ही दिखाते हैं।