दिवाली वाले दिन मोहल्ला अजीजगंज से लापता हो गया था संतोष, कंकाल मिला
- घरवालों ने पहले गुमशुदगी दर्ज कराई, बाद में दोस्त रिंकू पर लिखाई अपहरण की रिपोर्ट
- पुलिस हिरासत में रिंकू ने हत्या की बात कबूल की
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। थाना तिलहर क्षेत्र के गांव ढकिया परवेजपुर से लापता 24 वर्षीय संतोष सैनी का बुधवार को थाना सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के कैलहा के जंगल में कंकाल मिल गया। संतोष की हत्या कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला अजीजगंज में रहने वाले उसके दोस्त रिंकू ने अपने साथी गांव नवादा इंदेपुर निवासी सर्वजीत के साथ मिलकर की थी। पुलिस हिरासत में रिंकू ने बताया कि ढाई साल पहले उसकी प्रेमिका से संतोष ने छेड़खानी की थी। उसी दिन उसने तय कर लिया था कि वह संतोष की हत्या कर देगा। मौका मिलने पर दिवाली वाले दिन योजना बनाकर उसने संतोष की हत्या करने के बाद शव को जंगल में फेंककर उसके ऊपर तेजाब डाल दिया था। पुलिस गिरफ्त में रिंकू ने कहा कि उसे अपने दोस्त की हत्या करने का कोई अफसोस नहीं।
थाना तिलहर क्षेत्र के गांव ढकिया परवेजपुर में रहने वाले रामासरे सैनी का बड़ा बेटा संतोष सैनी रुद्रपुर की एक प्राइवेट कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। दिवाली वाले दिन 22 अक्तूबर को वह शहर के मोहल्ला अजीजगंज में रहने वाली अपनी बहन सुमन के घर सुबह 10.30 बजे आ गया था। बहन के घर कुछ देर रुकने के बाद वह बाजार चला गया। शाम को चार बजे संतोष अपने पिता रामासरे और छोटे भाई कौशल से अजीजगंज में मिला। इस दौरान उसने बाजार से खरीदकर लाए सामान को देते हुए कहा कि वह रिंकू के साथ घर आ जाएगा। दोनों रिंकू के पास संतोष को छोड़कर गांव चले गए, लेकिन जब देर रात तक वह घर नहीं पहुंचा तो परिवार वालों ने रिंकू से संपर्क किया। रिंकू ने कह दिया कि उसने बरेली मोड़ पर संतोष को छोड़ दिया था। परिवार वालों ने उसके बाद कई दिनों तक रिश्तेदारियों में संतोष को तलाशा, लेकिन उसका कहीं पता नहीं लगा। आठ अक्तूबर को रामासरे ने रिंकू पर संतोष के अपहरण का आरोप लगाते हुए कोतवाली में तहरीर दे दी। पुलिस ने मामले को अपहरण की धारा में तरमीम कर लिया था। इसी बीच पुलिस ने कई बार रिंकू को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन संतोष का कोई सुराग नहीं लगा। रिंकू के बार-बार बयान बदलने पर पुलिस ने उसके मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन निकलवाई। जिसमें रिंकू की लोकेशन दिए बयानों से नहीं मिली। शक के आधार पर पुलिस ने रिंकू से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया। रिंकू ने बताया कि उसने कोतवाली क्षेत्र के गांव नवादा इंदेपुर में रहने वाले अपने दोस्त सर्वजीत के साथ मिलकर संतोष की हत्या की साजिश रची थी। इसके लिए उसने दिवाली का दिन तय किया था। जब संतोष दिवाली वाले दिन सुबह में रिंकू से मिला तो उसने कहा था कि वह घरवालों को गांव जाने दे, वह उसे अपनी कार से गांव छोड़ देगा। इस बात के लिए संतोष राजी हो गया। अजीजगंज में चार बजे उसने संतोष को अपनी कार में बैठाया और सर्वजीत को भी अपने साथ ले लिया। पहले तो तीनों ने कांट क्षेत्र के गांव जाजलपुर में शराब पी। जब संतोष को नशा चढ़ गया तो उसने कार चांदापुर रोड पर ले ली और थाना सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र में कैलहा के जंगल से पहले संतोष की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इसके बाद उसका शव बबूल के जंगल में फेंक दिया। पहचान छुपाने के लिए शव पर दो बोतल तेजाब डाल दिया। सोमवार को रिंकू की निशानदेही पर पुलिस ने कैलहा के जंगल से संतोष का कंकाल बरामद कर लिया। मौके पर जली मिली पैंट और शर्ट परिवार वालों ने पहचान ली है।
प्रेमिका के छेड़ने पर
दिया घटना को अंजाम
रिंकू और संतोष की चार साल पहले अजीजगंज में ही बहन सुमन के घर दोस्ती हुई थी। रिंकू, सुमन के मोहल्ले में ही रहता था। ढाई साल पहले संतोष मोहम्मदी (लखीमपुर खीरी) में नौकरी करता था और कांशीराम कॉलोनी में कमरा किराए पर लेकर रहता था। रिंकू कार चलाता था। इसी दौरान उसके रोजा क्षेत्र में रहने वाली एक शादीशुदा आशा कार्यकर्ता से संबंध हो गए। रिंकू एक दिन अपनी प्रेमिका आशा कार्यकर्ता को मोहम्मदी में संतोष के कमरे पर ले गया। रात में रिंकू प्रेमिका के साथ संतोष के कमरे में ही रुका था। तभी संतोष ने रिंकू की प्रेमिका के साथ छेड़खानी की, यह बात रिंकू को नागवार गुजरी। अगले दिन सुबह वह अपनी प्रेमिक को लेकर शहर चला आया और संतोष से इस बात का बदला लेने की ठान ली।
दोस्त की दगाबाजी
सहन नहीं कर पाया
रिंकू ने पुलिस हिरासत में बताया कि वह संतोष को अपना सच्चा दोस्त मानता था। दोस्ती होने के बाद उसने कभी भी कोई बात संतोष से नहीं छुपाई थी। इसी विश्वास से वह अपनी प्रेमिका को संतोष के कमरे पर ले गया था, लेकिन संतोष की उसकी प्रेमिका पर नीयत खराब हो गई। वह अपने दोस्त की इस दगाबाजी को सहन नहीं कर पाया और उसको मौत के घाट उतार दिया। वह पिछले ढाई साल से संतोष की हत्या करने की फिराक में था, मौका लगते ही उसकी हत्या कर दी। उसे इस बात का कोई अफसोस नहीं है, अब चाहे उसे इसकी कोई भी सजा मिले।
संतोष की मौत से
परिवार की कमर टूटी
संतोष अपने परिवार में सबसे बड़ा बेटा था। पांच साल पहले ही परिवार का गुजारा करने के लिए नौकरी शुरू की थी। बड़ी बहन सुमन की शादी होने के बाद परिवार में सबसे समझदार वही रह गया था। इसलिए वह रुद्रपुर में नौकरी करने चला गया था। छोटा भाई कौशल छोटी बहनों किरन, नेहा, मोनिका और मां राजबेटी की देखभाल कर रहा था। संतोष की मौत से रामासरे और राजबेटी बहुत दुखी हैं।