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चौक में युवक की गोली मारकर हत्या

Sun, 26 Oct 2014 05:34 AM IST
Shahjahanpur
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दबंगई का विरोध करने पर ले ली सुभाष की जान
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- दो नामजद, फरार अभियुक्तों की तलाश में जुटी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। चौक इलाके के भारद्वाजी मोहल्ले में शनिवार शाम वहीं के रहने वाले 27 वर्षीय सुभाष देवल को दो युवकों ने गोली मारकर जान ले ली। सुभाष मोहल्ले में अपने घर के पास रोजाना युवकों की लगने वाली चठिया का विरोध करता था। इसी से कुछ युवक सीधे-सादे स्वभाव वाले सुभाष से रंजिश मानने लगे थे। पुलिस नामजद दोनों युवकों की तलाश कर रही है।
सुभाष देवल भारद्वाजी मोहल्ले में रहने वाले विशंभर देवल का बेटा था। पिता के साथ मिलकर सुभाष केरूगंज में दुकान के आगे फड़ लगाकर विशातखाना का सामान बेचते थे। शनिवार शाम करीब चार बजे वह सामान समेटकर घर आया और फिर पांच बजे कालीबाड़ी में रहने वाले अपने बड़े भाई राजीव उर्फ नन्हें के घर को पैदल निकला। पुलिस के अनुसार, वह घर से सौ कदम की दूरी पर ही पहुंचा था कि तभी इसी मोहल्ले के हर्षित और उत्कर्ष ने उस पर गोली चला दी। गोली पीठ में घुसने के बाद पेट चीरते हुए निकल गई। हमलावरों के भागने के बाद परिचित दो लोग सुभाष को लेकर पहले डॉ. वसीम के यहां गए, मगर वह अस्पताल में नहीं मिले। एक अन्य डॉक्टर के यहां पहुंचने पर हालत गंभीर बताते हुए उसे भर्ती नहीं किया गया। तब वे लोग सुभाष को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, मगर तब तक वह दम तोड़ चुका था।
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इस बीच पुलिस को गोली चलने की खबर मिली तो कोतवाली से फोर्स और सीओ सिटी राजेश्वर सिंह मोहल्ले में और फिर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां पुलिस को सुभाष मृत हालत में ही मिला। पुलिस ने मौके पर आकर छानबीन की। परिवार वालों का कहना था कि घर के पास लगने वाली चठिया में हुड़दंग और गाली-गलौज होने के कारण सुभाष विरोध करता था। कई बार हुज्जत भी हुई थी, पुलिस को भी बताया गया, मगर ध्यान नहीं दिया गया। विरोध करने के कारण ही चठिया लगाने वाले युवक उससे रंजिश मानने लगे थे और उनमें से दो ने शनिवार को उसकी हत्या कर दी। हर्षित और उत्कर्ष के खिलाफ रिपोर्ट लिख ली गई है।
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भाई दूज के दिन घर में पसरा मातम
सुभाष से बड़े दो भाई अशोक और नन्हें हैं, चार बहनों में से दो की शादी हो चुकी है। सुभाष अविवाहित ही था। शनिवार को भाई दूज को लेकर इस भरेपूरे परिवार में खुशियां थीं। सुबह बहनों से टीका कराने के बाद वह काम पर निकल गया था, बाहर ब्याही बहनें इस बार नहीं आ पाई थीं। परिवार का खर्चा आखिर इसी फड़ से तो निकलता था। त्योहार के चलते सुभाष जल्दी घर आ गया था। इसके कुछ ही देर बाद घटना होने से परिवार में मातम छा गया। मां ओमवती का रोते-रोते बुरा हाल था तो बहनें उसके माथे पर लगा टीका देखकर दहाड़े मार रही थीं।
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