रेलवे ने रोजा में जमीन का समतलीकरण तेज कर दिया है। शनिवार को यहां अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए होली चबूतरे को भी तोड़ दिया गया। इस दौरान लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन उनकी एक न चली। जमीन के समतलीकरण का विरोध यहां के किसान भी कर चुके हैं। हालांकि, रेलवे ने किसानों ने दावे को खारिज कर दिया और दावा किया कि जमीन किसानों की नहीं रेलवे की है।
रोजा में मंडी समिति के सामने सैकड़ों एकड़ जमीन है। 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसान कल्याण रैली इसी जमीन पर हुई थी। यहां रेलवे का पटरी वेल्डिंग प्लांट प्रस्तावित है। प्लांट के लिए हाल ही में काम चालू हुआ है। इसके लिए पुरानी रेल कॉलोनी के आवास भी ढहाए जा चुके हैं। शनिवार को कॉलोनी के पास बने होली चबूतरे को भी तोड़ दिया गया। हालांकि, लोगों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि चबूतरा अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ था। रेल अधिकारियों ने दूसरे स्थान पर होलिका दहन के लिए जमीन देने का भरोसा दिया तब विरोध शांत हुआ। इधर, सूत्रों की मानें तो रेल पटरी वेल्डिंग प्लांट का जो ब्लू प्रिंट है उसके हिसाब से आसपास के कई रास्ते भी बंद हो रहे हैं। सिर्फ प्रेम नगर कॉलोनी के पास एक ही रास्ता बचेगा। यही रास्ता श्मशान भूमि जाएगा और कब्रिस्तान भी जाएगा। बता दें कि रेलवे की इस जमीन पर बेरिकेडिंग का किसान भी विरोध कर चुके हैं। किसानों ने जमीन पर अपना दावा किया था। बाद में रेलवे ने दावा खारिज कर दिया। कहा गया कि राजस्व और रेलवे रिकार्ड में जमीन रेलवे के नाम दर्ज है।