गांधीजी की एक झलक को स्टेशन पर उमड़े थे लोग
एक बार आर्य समाज मंदिर में ठहरे थे, टाउनहाल में सभा की थी
पत्नी कस्तृूरबा, मीरा बेन और जेेबी कृपलानी भी साथ में थे
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिए महात्मा गांधी जैसा नेतृत्व भी बहुत कारगर साबित हुआ। एक ओर जहां क्रांतिकारियों का जोश अपना काम कर रहा था, वहीं, दूसरी ओर आमजन गांधीजी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार था। नरम-गरम की जुगलबंदी से अंग्रेजी हुकूमत थरथरा उठी थी। इस दौरान महात्मा गांधी शाहजहांपुर भी आए और उन्होंने हिंदू-मुसलमानों को एकता पाठ पढ़ाते हुए पूरी मजबूती के साथ अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था।
शाहजहांपुर में महात्मा गांधी तीन बार आए। एकबार वह 16 अक्तूबर 1920 को कलकत्ता जाते समय ट्रेन से होकर यहां से गुजरे थे। तब उनकी एक झलक पाने के लिए रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों युवा, बुजुर्ग, छात्र रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। भारत माता के जयकारों से रेलवे स्टेशन गूंज उठा था। इतिहासकार डॉ. एनसी मेहरोत्रा बताते हैं कि जैसे ही गांधीजी की ट्रेन प्लेटफार्म पर रुकी, तो छात्रों की गगनभेदी नारेबाजी से कुछ भी सुनाई देना भी बंद हो गया था। इसी बीच सफेद धोती पहने और कमर में घड़ी लटकाए गांधी जी अपने कोच के गेट तक आ गए। डॉ. मेहरोत्रा ने बताया व् िवह भी बसंतलाल खन्ना और अन्य साथियों के साथ गांधीजी को देखने के लिए रेलवे स्टेशन गए थे।
कुछ क्षण रुकने के बाद ट्रेन की सीटी बजी और गांधीजी हाथ हिलाते हुए कोच में वापस लौट गए। इसके बाद गांधीजी खादी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश के दौरे पर भी निकले थे। इससे पूर्व वर्ष 1929 जब महात्मा गांधी पहली बार 11 अक्तूबर को शाहजहांपुर आए। तब वह करीब छह घंटे यहां रुके। इस बीच उन्होंने आर्य समाज में रुककर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इसके बाद वह पत्नी कस्तूरबा गांधी, मीरा बेन, जेबी कृपलानी आदि के साथ 11 नवंबर 1929 को भी शाहजहांपुर आए थे। तब उन्होंने टाउनहाल में एक सभा को संबोधित किया था। सभा में उन्होंने जनपदवासियों से आग्रह किया था कि वह खादी ही पहने और बच्चों को भी खादी के ही वस्त्र पहनाएं। उनका कहना था कि खादी के माध्यम से हम विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करेंगे तो अंग्रेज कमजोर पड़ेंगे।
उनका साफ कहना था कि कांग्रेस की घोषणा मात्र से स्वराज्य टपकने वाला नहीं है। हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते। इस बीच उन्होंने महिलाओं को जागरूक करने के लिए पत्र भी दिया था, जिसमें लिखा था कि कोई कार्य हाथ में न लेना ठीक है, लेकिन यदि काम ले लिया है तो उसके लिए मर-मिटना चाहिए। टाउनहाल की सभा में गांधीजी को जनपद की ओर से 3750 रुपये की एक थैली भी भेंट की गई थी, जिसमें सर्वाधिक एक हजार रुपये शहर निवासी सुंदर लाल अग्रवाल ने दिए थे।