भक्सी नाला से गर्रा नदी में समा रहा तिलहर चीनी मिल का गंदा पानी
0 चार दशक से भक्सी नाले का प्रदूषण फसलों को कर रहा बरबाद
फोटो: 02, 25 व 26 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/तिलहर।
गंगा को मैली करने में केवल गर्रा-खन्नौत नदियों का प्रदूषण ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि जिले से होकर बहने वाली अन्य सहायक नदियां भी नगरीय क्षेत्रों का सीवेज, डेयरियों का अपशिष्ट और कल-कारखानों का कचरा गंगा में उड़ेल रही हैं। पिछले दिनों कन्नौज के पास गंगा में आक्सीजन की मात्रा घटने से मछलियां मरने पर गर्रा में प्रदूषण के लिए रोजा स्थित अवध शुगर मिल को जिम्मेदार मानते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री सीज करा दी। इसके बावजूद बरेली से लेकर यहां तक रामगंगा और गर्रा-खन्नौत में अपशिष्ट बहाने वाली अन्य फैक्ट्रियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होने से गंगा निर्मल अभियान चलाने वालों की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तिलहर की सहकारी चीनी मिल क्षेत्र के भक्सी नाला से गर्रा में करीब चार दशक से कचरा उड़ेल रही है, लेकिन मिल प्रबंधन को कार्रवाई का कोई खौफ नहीं है।
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खाद फैक्ट्री और पेपर मिल का कचरा समेट रहा भक्सी नाला
भक्सी नाला ब्लॉक खुदागंज क्षेत्र के गांव अकबरपुर उर्फ अकबरिया, सैदपुर और परमानंदपुर के समीप स्थित झावर से निकलता है। यह नाला तिलहर ब्लॉक के दर्जनों गांवों से होता हुआ तिलहर चीनी मिल के समीप से होकर निकलता है। चीनी मिल का कचरा लेकर नाला कांट क्षेत्र में स्थित खाद फैक्ट्री और पेपर मिल के पास पहुंचने पर इन दोनों कारखानों का केमिकल युक्त गंदा पानी भी उसी में मिल जाता है। वहां से नाला आगे चलकर गर्रा नदी में समाहित हो जाता है। चीनी मिल के दो सिरों से पानी इस नाले में जाता है। पूर्वी दिशा में स्थित शीरा टैंक का केमिकल युक्त लाल पानी और दक्षिण दिशा में स्थिति चिमनी के आसपास का केमिकल युक्त काला पानी निकलकर इसी नाले में चला जाता है।
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दो दर्जन से अधिक गांवों में खराब हो रही खेती योग्य जमीन
यह नाला नगर के पूर्वी भक्सी मोहल्ले के समीप से होता हुआ गांव बिलहरा के आगे बढ़ता है। कांट ब्लॉक की सीमा में प्रविष्ट होने से पहले नाला क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों से गुजरता है। कभी इन गांवों के किसान नाला में बहने वाले झावर के शुद्ध पानी से फसलों की सिंचाई करते थे, लेकिन अब नाला का दूषित पानी खेतों में घुसकर फसलों के साथ खेतों में मृदा की उर्वरता का भी क्षीण कर रहा है। आसपास के किसानों ने कई बार शिकायतें भी कीं, लेकिन चीनी मिल प्रबंध तंत्र ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया।
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फोटो 14 में।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने से होगा समस्या का समाधान
गंगा की प्रमुख सहायक नदी रामगंगा में प्रदूषण के कारणों पर गहन शोध कर चुके पर्यावरण विज्ञानी एवं एसएस कॉलेज के व्याख्याता डॉ. रमेश चंद्रा का मानना है कि बरेली से लेकर शाहजहांपुर तक नगरीय क्षेत्रों में फैक्ट्रियों को अपशिष्ट नदियों में गिरने से रोकने के साथ निकायों के अधिकारी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट विकसित करें तो गंगा निर्मल अभियान सार्थक हो सकता है। बरेली के 18 किमी क्षेत्र का कचरा लेकर रामगंगा आगे बढ़ने पर शाहजहांपुर की नदियों का प्रदूषण भी समेटने को मजबूर हो जाती है। डॉ. चंद्रा ने कहा कि घरों मेें इस्तेमाल होने वाली वाशिंग मशीनों में बड़ी मात्रा में कास्टिक पाउडर खपाए जाने से नदियों के पानी में भारी धातुओं के साथ क्षारीय तत्वों की अधिकता हो रही है और इसीलिए आक्सीजन की मात्रा घटने से जलीय जंतुओं की जीवन पर संकट बढ़ रहा है।
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चीनी मिल दो दिन पहले बंद हो चुकी है। इसलिए अब दूषित पानी नाले में गिरना बंद हो गया है। नाले में जाने वाला शीरे का पानी हानिकारक नहीं होता है। भक्सी नाला में फैक्ट्री का गंदा पानी जाने से रोकने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक करके समस्या के समाधानों का कोई रास्ता जल्द निकाला जाएगा।
-अतुल खन्ना, प्रधान प्रबंधक, तिलहर चीनी मिल