लू के थपेड़े बनकर दिन भर बदन जलाती रहीं पछुआ हवाएं
0 थर्मामीटर का पारा 2.2 डिग्री उछलकर 42.4 डिग्री पर जाकर ठहरा
0 आर्द्रता की कमी से शुष्क हवा को मौसम विशेषज्ञों ने बताया घातक
फोटो 03 व 04 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
पश्चिमी विक्षोभ के असर से खाड़ी देशों और पाकिस्तान से होकर आने वाली पछुआ हवाएं शुक्रवार को दिन भर लू के थपेड़े बनकर कहर ढाती रहीं। गत पांच दिन से तापमान 40 से 43 डिग्री के बीच झूलने से वातावरण से नमी लगभग गायब हो रही है और इस वजह से बुजुर्गों और बच्चों के लिए गर्मी अब जानलेवा प्रतीत होने लगी हैै। मौसम विशषेज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के कराचीं शहर में शुष्क पछुआ हवाएं अब तक सैकड़ों जानें ले चुकी हैं। चूंकि यही हवाएं अरब सागर और राजस्थान के तपते रेगिस्तान से गर्म होकर यहां पहुंच रही हैैं, इसलिए गर्मी में सेहत का बनाए-बचाए रखने के लिए सरकारी एजेंसियों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी।
सूर्योदय होने के साथ खिली तीखी धूप ने सुबह होते ही भीषण गर्मी का अल्टीमेटम दे दिया। सुबह दस बजे तक धूप असहनीय होने लगी और इसी के साथ पछुआ हवा के रफ्तार पकड़ने से भीषण गर्मी ने जनजीवन का जलाना शुरू कर दिया। आग की लपटों जैसी हवा ने बदन जलाना शुरू किया तो लोगों ने सिर पर कैप, तौलिया, गमछा आदि लपेटने के साथ ठेलों पर शिकंजी के घूंट भरने शुरू किए, लेकिन गर्मी के बिगड़ैल तेवरों के आगे यह सारे प्रयास निरर्थक साबित हुए। लपट जैसी लू ने सड़कों और बाजारों में कर्फ्यू जैसा माहौल बना दिया।
बहादुरगंज की छोटी सब्जी मंडी में दोपहर के वक्त भीड़ होने से निकलना कठिन होता है, लेकिन गर्मी के चलते बाजार में ग्राहकों से अधिक सब्जी विक्रेता नजर आए। इसी तरह हमशा रौनक बरकरार रखने वाले बहादुरगंज मेन मार्केट, गल्ला मंडी, सदर बाजार, गोविंदगंज, मंडी, टाउनहाल, चौक सराफा आदि में दोपहर से शाम तक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहा। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार रात का आसमान साफ होने के कारण न्यूनतम तापमान में 3.1 डिग्री की गिरावट आई, लकिन गत 24 घंटे के दौरान आद्र्रता 11 प्रतिशत घटकर 56 फीसदी रह जाने से गर्मी से राहत महसूस नहीं हुई।